दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा पर सवाल उठाते हुए उन्हें इस केस से हटने (रिक्यूज़ल) की मांग की है। केजरीवाल का कहना है कि उन्हें इस मामले में निष्पक्ष सुनवाई को लेकर आशंका है।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान केजरीवाल ने स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखा और जज से आग्रह किया कि वे इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लें। उन्होंने अपने पक्ष में लगभग दस आधार बताते हुए दावा किया कि अदालत के पिछले आदेशों में एक पैटर्न दिखता है, जिसमें जांच एजेंसियों (सीबीआई और ईडी) के तर्कों को अधिक स्वीकार किया गया है।
केजरीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का संबंध कुछ कानूनी कार्यक्रमों और संगठनों से रहा है, जिससे उनकी निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि जज के परिवार के सदस्य सरकारी वकीलों के अधीन कार्यरत हैं, जिससे हितों के टकराव की स्थिति बन सकती है।
दूसरी ओर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि केवल आशंका या अनुमान के आधार पर किसी जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाना और बेंच बदलने की मांग करना न्यायिक प्रक्रिया के लिए सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे आधारों पर जज खुद को अलग करने लगें, तो न्यायिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
यह पूरा मामला दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच सीबीआई और ईडी कर रही हैं। इस मामले में अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगे थे। मार्च 2024 में केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार भी किया था।
फरवरी 2026 में निचली अदालत ने पर्याप्त सबूतों के अभाव में केजरीवाल और अन्य आरोपियों को राहत देते हुए उन्हें केस से डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद मामला फिर से सुनवाई में आया।
अब यह मामला हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष चल रहा है, और केजरीवाल ने उनसे केस से हटने की मांग की है। अदालत का फैसला इस बात पर तय करेगा कि आगे सुनवाई उसी बेंच में होगी या किसी अन्य बेंच को मामला सौंपा जाएगा।

