दुर्लभ बीमारी ने बदली किस्मत, IIT रुड़की के इंजीनियर बने बॉलीवुड के ‘शैतान’

shikha verma
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नई दिल्ली: फिल्मी दुनिया में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा के बाद अभिनय की राह चुनी। लेकिन कुछ ही कलाकार अपनी अलग पहचान और अनोखे किरदारों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे ही एक अभिनेता हैं अनिरुद्ध अग्रवाल, जिन्होंने IIT रुड़की से पढ़ाई करने के बाद फिल्मों में कदम रखा और खासतौर पर हॉरर फिल्मों में यादगार विलेन और राक्षस के किरदार निभाए।

‘पुराना मंदिर’ से मिली पहचान

अनिरुद्ध अग्रवाल ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत रामसे ब्रदर्स की फिल्म ‘पुराना मंदिर’ (1984) से की थी। इस फिल्म में उन्होंने राक्षस की भूमिका निभाई थी, जिसने उन्हें हॉरर फिल्मों की दुनिया में खास पहचान दिलाई। उनकी लंबी कद-काठी और अलग चेहरे के कारण उन्हें ऐसे किरदारों में खास पहचान मिली।

दुर्लभ बीमारी बनी वजह

जानकारी के अनुसार, अनिरुद्ध अग्रवाल को पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर के कारण एक दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिससे उनके चेहरे की बनावट और शरीर की संरचना में बदलाव आ गया। इसी वजह से उन्हें फिल्मों में बिना ज्यादा मेकअप के भी डरावने किरदारों के लिए चुना जाने लगा।

हॉरर फिल्मों के पसंदीदा चेहरा

अनिरुद्ध अग्रवाल रामसे ब्रदर्स की फिल्मों में लगातार नजर आए और हॉरर जॉनर का जाना-पहचाना चेहरा बन गए। उन्होंने ‘बंद दरवाजा’, ‘त्रिमूर्ति’, ‘गुब्बारे’ जैसी फिल्मों में काम किया।

इसके अलावा उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘मेला’ और अक्षय कुमार की ‘तलाश: द हंट बिगिन्स’ जैसी फिल्मों में भी छोटे लेकिन यादगार रोल निभाए।

IIT से फिल्म इंडस्ट्री तक का सफर

IIT रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से इंजीनियरिंग करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना अपने आप में एक अनोखा फैसला था। उन्होंने एक स्थिर करियर छोड़कर अभिनय को चुना और अपनी अलग पहचान बनाई। आज भले ही अनिरुद्ध अग्रवाल फिल्मी दुनिया से दूर हैं, लेकिन हॉरर फिल्मों में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है।

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