लोकसभा में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन (डीलिमिटेशन) से जुड़े विधेयकों पर बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह महिलाओं को आरक्षण देने के खिलाफ है, जबकि विपक्षी नेताओं ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह बिल वास्तव में महिला आरक्षण से जुड़ा नहीं है, बल्कि देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे एससी, एसटी और ओबीसी समुदायों के अधिकार प्रभावित होंगे। उन्होंने सरकार को “डरी हुई” बताते हुए कहा कि यह मुद्दों का सामना करने से बच रही है।
अपने भाषण में राहुल गांधी ने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि डर अक्सर हमारे मन में होता है, और सरकार भी इसी तरह काल्पनिक डर से प्रभावित होकर निर्णय ले रही है।
बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को “जादूगर” कहे जाने पर विवाद खड़ा हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस टिप्पणी की कड़ी निंदा की और माफी की मांग की।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि उनकी पार्टी सभी वर्गों के साथ समान व्यवहार करती है। इस पर अखिलेश यादव ने सामाजिक भेदभाव का मुद्दा उठाते हुए एक व्यक्तिगत घटना का जिक्र किया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर चिंता जताई। उनका कहना था कि इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है और दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक महत्व कम हो सकता है। डीएमके नेता कनिमोझी करुणानिधि ने भी बिल की टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण का वे समर्थन करते हैं, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना गलत है। वहीं, दक्षिण भारत के कई दलों ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आश्वासन दिया कि परिसीमन प्रक्रिया में किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33% आरक्षण देना उनका अधिकार है और यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है।
सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी और बड़ी संख्या में सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि, विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम बता रहा है।

