पहलगाम आतंकी हमले की NIA चार्जशीट में कई बड़े खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच में यह बात सामने आई है कि स्थानीय मदद और समय पर सूचना मिलने से 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। चार्जशीट में टूरिस्ट गाइड परवेज और बशीर अहमद की भूमिका को लेकर भी अहम जानकारी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकियों ने स्थानीय लोगों से संपर्क किया और भोजन व ठहरने की व्यवस्था भी ली थी। इस दौरान उन्होंने इलाके की जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछताछ की। सूत्रों का दावा है कि अगर स्थानीय गाइड समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को जानकारी देते, तो इस बड़े हमले को रोका जा सकता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि 21 अप्रैल को आतंकियों को इलाके में कई बार देखा गया था। वे स्थानीय लोगों से संपर्क में थे और मदद भी ले रहे थे। बाद में 22 अप्रैल को बैसरन घाटी में हुए हमले के दौरान 26 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई।
NIA के अनुसार, हमले की साजिश पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से जुड़ी हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि एक टेलीग्राम चैनल के जरिए जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था, जिसे बाद में बदल दिया गया। एजेंसियों का मानना है कि यह डिजिटल माध्यम के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश थी।
चार्जशीट में सबसे बड़ा खुलासा लश्कर-ए-तैयबा के मोस्ट वांटेड आतंकी सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ को लेकर किया गया है, जिसे इस हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक वह पाकिस्तान में बैठकर तीनों आतंकियों को निर्देश दे रहा था और लगातार संपर्क में था।
NIA की जांच अभी जारी है और एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।


