तीन महीने तक सड़क पर भटकी मां, बेटे के लिए इंसाफ़ की जंग

Bole India
4 Min Read

Dehradun के प्रेमनगर क्षेत्र में 18 वर्षीय क्षितिज चौधरी की सड़क हादसे में हुई मौत को लगभग दो साल बीत चुके हैं, लेकिन परिवार को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। आरोप है कि मामले में शामिल संदिग्ध चालक तक पुलिस अभी तक नहीं पहुंच पाई है।

इकलौते बेटे को खो चुकी मां ललिता चौधरी इन दो वर्षों में लगातार थानों और अधिकारियों के चक्कर लगाती रहीं। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में गंभीरता की कमी रही, जिसके बाद उन्होंने खुद ही सबूत जुटाने शुरू कर दिए।


क्या हुआ था उस रात?

16 फरवरी 2024 की रात करीब 2:45 बजे, क्षितिज अपने एक दोस्त के साथ प्रेमनगर में पैदल जा रहा था। परिवार के अनुसार, तेज रफ्तार से आए एक डंपर ने उसे टक्कर मार दी और चालक मौके से फरार हो गया।

घटना के बाद एंबुलेंस पहुंचने में लगभग 45 मिनट लग गए। पहले उसे दून अस्पताल ले जाया गया और फिर गंभीर हालत में ऋषिकेश स्थित एम्स रेफर किया गया, जहां 17 फरवरी की शाम उसकी मौत हो गई।

19 फरवरी को ललिता चौधरी ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कराया, लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने शुरुआती शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया।


“सुबूत है तो लेकर आओ”

ललिता चौधरी बताती हैं कि जब उन्होंने पुलिस से जांच की प्रगति के बारे में पूछा, तो उन्हें कहा गया—“अगर आपके पास कोई सबूत है तो लेकर आइए।”

यहीं से उन्होंने खुद जांच शुरू करने का फैसला किया।

वह कहती हैं, “अगर मैं नहीं करती, तो कोई नहीं करता।”

इसके बाद उन्होंने कई महीनों तक घटनास्थल पर जाकर लोगों से बात की, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की और जानकारी जुटाई।

“मैं तीन महीने तक रोज़ सड़क पर घूमती रही,” वह बताती हैं।

उन्हें एक सीसीटीवी फुटेज मिला, जिसके आधार पर उन्होंने आरटीओ कार्यालय से संभावित वाहनों की जानकारी निकाली और करीब 10 गाड़ियों के नंबर पुलिस को सौंपे। बावजूद इसके, उनका कहना है कि जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

करीब डेढ़ साल बाद उन्हें पता चला कि मामले में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई है।


फिर उठी न्याय की आवाज़

हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ललिता चौधरी ने एक बार फिर अपने बेटे के लिए न्याय की मांग उठाई। इस दौरान उनकी मुलाकात Rakesh Tikait से हुई, जिनसे उन्होंने पूरा मामला साझा किया।

Bharatiya Kisan Union के प्रतिनिधियों ने उनके समर्थन में पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और नए सबूत पेश किए। इसके बाद पुलिस ने मामले की दोबारा जांच का आश्वासन दिया है।


पुलिस का क्या कहना है?

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोभाल के अनुसार, पहले जांच पूरी की जा चुकी थी, लेकिन अब नए सबूतों के आधार पर मामले को फिर से देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज का पहले भी निरीक्षण किया गया था, और अब संबंधित थाना प्रभारी को दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और आगे की जांच के लिए अनुमति ली जा रही है।


“जो काम पुलिस को करना चाहिए था, वो मैंने किया”

ललिता चौधरी मूल रूप से Muzaffarnagar की रहने वाली हैं और अकेले अपने परिवार की जिम्मेदारी संभालती रही हैं।

वह कहती हैं, “जो काम पुलिस को करना चाहिए था, वो मैंने किया।”

आज भी उनके शब्दों में दर्द साफ झलकता है। वह याद करती हैं, “मेरा बेटा कह रहा था—‘मम्मी मुझे बचा लो।’”

Share This Article
Leave a Comment