गुरजीत सिंह, जो पिछले 18 महीने से अधिक समय से लगभग 300 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर बैठे थे, उन्हें 24 अप्रैल 2026 की सुबह सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। यह अभियान प्रशासन, नागरिक सुरक्षा और भारतीय सेना के संयुक्त प्रयास से पूरा हुआ।43 वर्षीय गुरजीत सिंह 12 अक्टूबर 2024 से टावर पर बैठे थे। वे ‘बेअदबी’ की घटनाओं के खिलाफ सख्त कानून बनाने की मांग कर रहे थे।
क्यों कर रहे थे प्रदर्शन?
गुरजीत सिंह की मांग ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ से जुड़ी थी, जिसे 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने पारित किया और 17 अप्रैल को यह कानून बन गया। हालांकि इस कानून को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है।
कैसे उतारा गया नीचे?
समाना के इस टावर से गुरजीत सिंह को उतारने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। दमकलकर्मियों और सुरक्षा टीम ने पहले से अभ्यास किया हुआ था। अभियान में शामिल एक सदस्य ने बताया कि उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़कर रस्सियों के सहारे नीचे लाया गया। इसके बाद उन्हें जांच के लिए अस्पताल भेजा गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।
टावर पर कैसे बिताए 18 महीने?
गुरजीत सिंह, जो एक पूर्व सैनिक और किसान हैं, ने बताया कि:
- उन्होंने टावर पर टेंट लगाकर रहना शुरू किया
- शुरुआत में पानी और खाने की भारी कमी थी
- एक परिचित रोज़ उन्हें खाना, दवाइयां और जरूरी सामान पहुंचाता था
- तेज़ हवाएं, बारिश और ठंड सबसे बड़ी चुनौती थीं
- सुरक्षा कारणों से वे रात में जागते और दिन में सोते थे
उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें कई स्वास्थ्य समस्याएं भी हुईं, लेकिन वे अपनी मांग पर डटे रहे।
मदद कैसे मिलती थी?
एक युवक रोज़ टावर पर चढ़कर उन्हें खाना, कपड़े और दवाइयां पहुंचाता था। करीब 300 फीट की ऊंचाई तक पहुंचने में उसे लगभग 40 मिनट लगते थे।
गुरजीत सिंह का यह लंबा और जोखिम भरा प्रदर्शन कानून बनने के बाद समाप्त हुआ। हालांकि अब इस कानून को अदालत में चुनौती दी गई है, जिससे आगे इस मुद्दे पर कानूनी बहस जारी रह सकती है।

