राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताज़ा “Crime in India 2024” रिपोर्ट ने देश में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। हालांकि कुछ मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कुल मिलाकर स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
महिलाओं के खिलाफ अपराध की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में भारत में महिलाओं के खिलाफ कुल 4,41,534 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन अपराधों की प्रकृति और गंभीरता लगातार चिंता बढ़ा रही है।
महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक मामले पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता यानी घरेलू हिंसा के सामने आए। ऐसे मामलों की संख्या 1,20,227 रही, जो कुल अपराधों का लगभग 27.2 प्रतिशत है। यह दर्शाता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सबसे बड़ा खतरा घर के भीतर से ही बना हुआ है।
इसके बाद महिलाओं के अपहरण (67,829 मामले) और छेड़छाड़ व यौन उत्पीड़न (48,303 मामले) प्रमुख रूप से दर्ज किए गए। ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सार्वजनिक स्थानों और डिजिटल माध्यमों पर भी महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि वर्ष 2024 में बलात्कार के 29,536 मामले दर्ज हुए। एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अनजान व्यक्ति नहीं बल्कि पीड़िता के परिचित, पड़ोसी, रिश्तेदार या सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े व्यक्ति पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों में भरोसे के दुरुपयोग की घटनाएं अधिक हैं।
बच्चों के खिलाफ अपराध में बढ़ोतरी
बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में भी वृद्धि दर्ज की गई है। NCRB रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में कुल 1,87,702 मामले दर्ज हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5.9 प्रतिशत अधिक हैं।
इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी अपहरण और गुमशुदगी मामलों की रही, जिनकी संख्या 75,108 (लगभग 40 प्रतिशत) रही। इसके अलावा POCSO एक्ट के तहत 69,191 मामले दर्ज किए गए, जो बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में 98,375 बच्चे लापता हुए, जिनमें बड़ी संख्या में लड़कियां शामिल थीं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ोतरी दिखाता है और सामाजिक चिंता को और गहरा करता है।
इसके अलावा मानव तस्करी के भी 2,135 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 6,018 लोगों को शिकार बनाया गया। यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
NCRB की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध अब भी एक बड़ी सामाजिक चुनौती हैं। घरेलू हिंसा, अपहरण, यौन उत्पीड़न और मानव तस्करी जैसे अपराध लगातार बढ़ते हुए पैटर्न को दिखा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए न केवल कड़े कानूनों की जरूरत है, बल्कि समाज में जागरूकता, शिक्षा और डिजिटल सुरक्षा को भी मजबूत करना आवश्यक है।

