APP में घमासान, राघव चड्ढा को साइडलाइन करने पर बवाल

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आम आदमी पार्टी (आप) ने राज्यसभा में बड़ा बदलाव करते हुए राघव चड्ढा की जगह अशोक कुमार मित्तल को पार्टी का डिप्टी लीडर नियुक्त कर दिया है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।

राघव चड्ढा ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे संसद में लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे हैं। उन्होंने पूछा कि उनके काम से पार्टी को आखिर क्या नुकसान हुआ, और उनके बोलने पर रोक लगाने की जरूरत क्यों पड़ी।

इसके जवाब में आप नेताओं ने उन पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं का आरोप है कि राघव चड्ढा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चुप रहते हैं और नरेंद्र मोदी की आलोचना करने से बचते हैं। साथ ही, अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान उनके लंदन में होने पर भी सवाल उठाए गए।

आतिशी और संजय सिंह समेत कई नेताओं ने आरोप लगाया कि राघव चड्ढा पार्टी के अहम मुद्दों पर सक्रिय नहीं हैं। सौरभ भारद्वाज ने यहां तक कहा कि वे संसद में गंभीर मुद्दों की बजाय हल्के विषय उठा रहे हैं।

दूसरी ओर, विपक्ष ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। अमरिंदर सिंह वडिंग ने दावा किया कि राघव चड्ढा जल्द ही पार्टी छोड़ सकते हैं या उन्हें बाहर किया जा सकता है।

हालांकि, अशोक मित्तल ने इस बदलाव को सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि पार्टी समय-समय पर नेताओं को नई जिम्मेदारियां देती रहती है और इससे संगठन को मजबूत करने में मदद मिलती है।

राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर करियर शुरू करने वाले चड्ढा, अरविंद केजरीवाल के साथ 2013 में जुड़े और जल्द ही पार्टी के सबसे युवा प्रवक्ता बन गए। वे 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बने और 2022 में पंजाब से राज्यसभा सांसद बने, जहां वे सबसे युवा सांसदों में शामिल रहे।

अब पार्टी के भीतर चल रहा यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

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