ईरान में जारी संघर्ष का असर अब कंडोम उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल—जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पाद, अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल—की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार, भारत का लगभग 8000 करोड़ रुपये का कंडोम बाजार इस दबाव को महसूस कर रहा है। अमोनिया की कीमतों में 40–50% तक वृद्धि हो सकती है, जिससे सिलिकॉन ऑयल और अन्य इनपुट महंगे हो जाएंगे। इसका सीधा असर उत्पादन लागत और रिटेल कीमतों पर पड़ेगा।
एक उद्योग अधिकारी ने बताया कि कंडोम अब केवल एक हेल्थ प्रोडक्ट नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल प्रोडक्ट बन चुका है, इसलिए इसकी सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का व्यापक असर हो सकता है।
क्यों बढ़ रही है कीमतों की चिंता?
कंडोम निर्माण में अमोनिया का उपयोग लेटेक्स को स्थिर रखने और अतिरिक्त प्रोटीन हटाने के लिए किया जाता है, जबकि सिलिकॉन ऑयल लुब्रिकेंट के रूप में काम करता है। इनकी कीमत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो जाता है।
इसके अलावा, पैकेजिंग सामग्री जैसे पीवीसी फॉइल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य केमिकल्स की सप्लाई में भी रुकावट आई है। लॉजिस्टिक्स की समस्याएं भी स्थिति को और जटिल बना रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्री मार्गों में बाधा—खासतौर पर होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने—की वजह से शिपिंग समय 15–20 दिन तक बढ़ गया है। हवाई परिवहन पर भी असर पड़ा है, जिससे सप्लाई चेन धीमी हो गई है।
एक्सपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग पर असर
कई भारतीय कंपनियां अपने प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा विदेशों में निर्यात करती हैं, लेकिन अब उन्हें शिपिंग कंटेनरों की कमी और बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निर्माताओं का कहना है कि वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालने में असमर्थ हैं, जिससे उनका मार्जिन प्रभावित हो रहा है।
हेल्थ सेक्टर में बढ़ी चिंता
यह मुद्दा सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी चिंता का कारण बन रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंडोम महंगे या कम उपलब्ध होते हैं, तो:
- अनचाहे गर्भधारण के मामले बढ़ सकते हैं
- यौन संचारित रोगों (STDs) का जोखिम बढ़ सकता है
- परिवार नियोजन कार्यक्रमों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
भारत में पहले से ही कंडोम का उपयोग सीमित है—राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के अनुसार, केवल लगभग 9% विवाहित जोड़े इसे प्राथमिक गर्भनिरोधक के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी वास्तविक कमी से ज्यादा सप्लाई को लेकर बनी आशंकाओं के कारण भी हो रही है।
हालांकि, यदि युद्ध और सप्लाई चेन की समस्याएं लंबी चलीं, तो कंडोम की उपलब्धता और कीमत दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

