वेदांता लिमिटेड के छत्तीसगढ़ स्थित थर्मल पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट के बाद कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 19 लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। इस हादसे में अब तक 21 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्लांट में कम समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश के दौरान बॉयलर पर अत्यधिक दबाव पड़ गया, जिससे विस्फोट हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, लोड को तेजी से 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट किया गया, जिससे फर्नेस के अंदर दबाव असामान्य रूप से बढ़ गया।
जांच में यह भी पाया गया कि तकनीकी गड़बड़ियों के संकेत पहले से मौजूद थे, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। विशेष रूप से पीए फैन में खराबी के कारण हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ा, जिससे अधजला ईंधन जमा हुआ और अचानक विस्फोट की स्थिति बन गई।
पुलिस का कहना है कि यह महज तकनीकी दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रबंधन की गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। इसी आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।
हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल अग्रवाल ने इसे बेहद दुखद बताते हुए पीड़ितों के परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। कंपनी ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है, जबकि राज्य और केंद्र सरकार ने भी अलग-अलग आर्थिक सहायता देने की बात कही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि थर्मल पावर प्लांट में लोड बढ़ाने की प्रक्रिया धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक की जानी चाहिए। अचानक लोड बढ़ाने से बॉयलर और अन्य उपकरणों पर दबाव बढ़ता है, जिससे इस तरह के हादसों का खतरा बढ़ जाता है।
परिजनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अगर समय रहते तकनीकी खामियों पर ध्यान दिया जाता और सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

