योगी सरकार का बड़ा कदम, आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा के साथ मिलेगा 40 लाख तक बीमा

shikha verma
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नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाले वेतन तक सीमित नहीं होती। कर्मचारी के लिए नौकरी उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों के भविष्य और मुश्किल समय में मिलने वाले सहारे से भी जुड़ी होती है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में लंबे समय से वेतन, EPF, ESIC और नौकरी की स्थिरता को लेकर कर्मचारियों के सामने कई तरह की चुनौतियां रही हैं।

इन्हीं समस्याओं को दूर करने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (UPCOS) का शुभारंभ किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को निगम की शुरुआत के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, भुगतान, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण को एक संस्थागत एवं डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने की पहल की।

सरकार का उद्देश्य करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

एक कर्मचारी, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म

UPCOS के माध्यम से सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक ही तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। इसके तहत विभागों की मैनपावर जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और मानव संसाधन की बेहतर योजना तैयार की जा सकेगी।

भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के साथ योग्यता एवं मेरिट को आधार बनाया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार की आरक्षण नीति के अनुरूप SC, ST, OBC, EWS, दिव्यांगजन, महिलाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक खाते, उपस्थिति, भुगतान और अन्य सेवा संबंधी जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर देख सकेगा। शिकायत दर्ज कराने के साथ उसकी स्थिति को ट्रैक करने और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था भी की जाएगी।

हर महीने 5 तारीख तक खाते में पहुंचेगा वेतन

नई व्यवस्था का सबसे अहम पहलू आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक दिलाना है। कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में पारिश्रमिक उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

इसके साथ ही EPF और ESIC से जुड़ी जिम्मेदारियों को भी अधिक स्पष्ट किया गया है। पात्र कर्मचारियों के खाते खुलवाने और नियमित अंशदान जमा कराने की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया जाएगा। एजेंसियों को अंशदान जमा होने का प्रमाण भी निगम को उपलब्ध कराना होगा।

इससे कर्मचारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।

मनमाने तरीके से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी

आउटसोर्स कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में नौकरी की असुरक्षा भी शामिल रही है। नई व्यवस्था में एजेंसी को कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने की अनुमति नहीं होगी।

अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। इससे एजेंसियों की मनमानी पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया है।

प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन पर जोर

UPCOS की व्यवस्था केवल भर्ती तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की दक्षता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जाएगी।

सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाएगा। योग्यता, दक्षता और निर्धारित मानकों के आधार पर चयन किया जाएगा। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों पर साक्षात्कार नहीं होगा।

इसके अलावा विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान किया गया है।

मातृत्व अवकाश समेत मिलेंगे वैधानिक लाभ

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों को सिर्फ वेतन और नौकरी की सुरक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है। पात्र कर्मचारियों को EPF, ESIC और अन्य वैधानिक सेवा लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश समेत अनुमन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। ESIC के माध्यम से पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

40 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा

सामाजिक सुरक्षा के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देने का भी प्रावधान किया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए समझौते के तहत निर्धारित वेतन श्रेणी के अनुसार कर्मचारियों को लगभग 40 लाख रुपये तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर मिल सकेगा।

स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी।

इसके अतिरिक्त जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख रुपये तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख रुपये तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपये तक की सुविधा का प्रावधान किया गया है।

कर्मचारी ही नहीं, परिवार की भी चिंता

UPCOS के तहत सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी के साथ उसके परिवार तक भी बढ़ाया गया है। किसी बड़ी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में परिजनों को आर्थिक सहायता देने के प्रावधान किए गए हैं।

कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए 8 लाख रुपये तक और पुत्री की शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए 8 से 10 लाख रुपये तक सहायता दी जा सकेगी। वहीं कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए 50 हजार रुपये तक की व्यवस्था की गई है।

कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो-बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध कराने की बात कही गई है। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था की जाएगी।

बिचौलियों के बजाय जवाबदेह व्यवस्था

UPCOS का एक प्रमुख उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में विभाग, एजेंसी और कर्मचारी की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

विभाग, निगम और सेवा प्रदाता एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के जरिए जवाबदेही तय होगी। भर्ती, पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और अन्य सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन एवं निगरानी की जाएगी।

इससे कर्मचारियों को अपनी सेवा संबंधी जानकारी के लिए अलग-अलग कार्यालयों या एजेंसियों पर निर्भरता कम होगी।

3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा लाभ

योगी सरकार की इस नई पहल से प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, अस्पतालों, नगर निकायों और अन्य संस्थानों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

समय पर वेतन, नौकरी की सुरक्षा, EPF-ESIC, बीमा, मातृत्व अवकाश और परिवार से जुड़ी सहायता जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को एक अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित रोजगार व्यवस्था देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

UPCOS के लागू होने के साथ अब आउटसोर्स कर्मचारी केवल एजेंसी के भरोसे नहीं, बल्कि एक संस्थागत, डिजिटल और जवाबदेह व्यवस्था का हिस्सा होंगे।

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