बिग बॉस 19 के फिनाले की रात जैसे ही शो के विनर का नाम घोषित हुआ, पूरा मंच तालियों से गूंज उठा। गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) ने न सिर्फ ट्रॉफी जीती बल्कि लाखों दर्शकों का दिल भी। शो के एक टास्क में गौरव ने रनरअप फरहाना भट्ट से कहा था, “तू देखेंगी और फिनाले में खड़ी होकर मेरे लिए तालियां बजाएगी” और बिल्कुल ऐसा ही हुआ। जो एक लाइन उस समय सिर्फ कॉन्फिडेंस लग रही थी, वो बाद में सच्चाई बनकर सामने आई।
गौरव खन्ना की बिग बॉस जर्नी आसान नहीं थी। एंट्री के पहले से घर वालों ने उनका मज़ाक उड़ाया। लेकिन गौरव ने न तो खुद को बदला, न अपना खेल। धीरे-धीरे घरवालों और दर्शकों के बीच उनकी पहचान एक शांत, समझदार और स्ट्रॉन्ग खिलाड़ी के रूप में बनने लगी। यही पहचान अंत में बड़ी जीत में बदल गई।
1. पॉजिटिव ग्रुप का हिस्सा बने
शो की शुरुआत में ही गौरव खन्ना ने घर का माहौल समझ लिया और खुद को पॉजिटिव ग्रुप के साथ जोड़ लिया। धीरे-धीरे वे इस ग्रुप के लीडर की तरह दिखने लगे। उनके साथ प्रणित मोरे, अभिषेक बाजाज, अशनूर कौर, आवेज दरबार, नगमा और मृदुल तिवारी जैसे कंटेस्टेंट थे। गौरव की सबसे अच्छी बात यह थी कि वे हर टास्क में अपनी टीम को आगे बढ़ाने की कोशिश करते थे। कैप्टेंसी वाले टास्क में भी वे खुद आगे आने के बजाय चाहते थे कि उनकी टीम का कोई सदस्य कैप्टन बने। इस वजह से लोग उन्हें भरोसेमंद और सपोर्टिव मानने लगे।
2. जहाँ बाकी भटके, वहाँ गौरव टिके रहे
शुरुआत में मास्टरमाइंड का टैग जीशान कादरी को दिया गया था, लेकिन समय बीतने के साथ गेम पूरी तरह गौरव के हाथ में आता गया। गौरव ने समझा कि बिग बॉस में संख्या यानी लोगों की गिनती सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने हर कंटेस्टेंट के साथ अपने संबंध संतुलित रखे न बहुत नजदीकी, न बहुत दूरी। उनकी यही रणनीति उन्हें बड़े टास्क जीतने और फिनाले तक चुपचाप पहुंचाने में कामयाब रही। बिना शोर मचाए गेम खेलना आज के बिग बॉस में भी एक दुर्लभ कला है, और गौरव ने इसे साबित किया।
3. पॉजिटिव रोल मॉडल बने
बिग बॉस में अक्सर वही लोग चर्चा में रहते हैं जो हर वक्त झगड़ा करें, चिल्लाएं और ड्रामा करें। लेकिन गौरव खन्ना ने इस फॉर्मूले को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने न तो बेवजह की बहसों में कूदना पसंद किया और न ही दूसरों की उकसावे वाली बातों पर अपना आपा खोया। जब बाकी घरवाले छोटे-छोटे मुद्दों पर आवाज़ उठाते थे, गौरव वहीं खड़े होकर शांत दिमाग से हालात को संभालते थे। उनका हर रिएक्शन सोच-समझकर होता था, इसी वजह से घर में भी लोग उन्हें सबसे मैच्योर मानते थे।
4. रिस्पेक्टफुल गेमप्ले
बिग बॉस 19 दो ग्रुप में बंटा हुआ था। ऐसे माहौल में किसी कंटेस्टेंट का सभी से अच्छा संबंध बनाना आसान नहीं। लेकिन गौरव खन्ना इस मामले में भी गेम से आगे निकल गए। उन्होंने कभी ऐसी लड़ाई नहीं की जिसमें नफरत पैदा हो जाए। न वो किसी को अपमानित करते दिखे और न ही उन्होंने किसी की पीठ पीछे बुरा कहा। उनका व्यवहार हर टास्क में दिखता था, वे प्रतिस्पर्धा करते थे, लेकिन गरिमा के साथ। इसी वजह से घर के 18 कंटेस्टेंट्स में से एक भी ऐसा नहीं था जिसने कहा हो कि गौरव ने उसके साथ गलत किया।
5.वीकेंड का वार पर चमके
शो के शुरुआती हफ्तों में सलमान खान ने गौरव का खूब मजाक उड़ाया था। लेकिन धीरे-धीरे सलमान भी गौरव की ईमानदारी और स्थिरता के फैन बनते गए।
फिनाले से कुछ हफ्ते पहले सलमान ने कहा, गौरव का गेम शुरू से एक जैसा रहा है। अगर ये उनकी पर्सनैलिटी है, तो कमाल है। और अगर ये गेम है, तो हैट्स ऑफ ब्रो। सलमान की इस लाइन ने दर्शकों को संकेत दे दिया था कि गौरव टॉप फाइनलिस्ट में जरूर होंगे। और वही हुआ वे फिनाले में पहुंचे और फिर शो जीत भी गए।
6. दबाव में भी नहीं टूटे
बिग बॉस का घर मानसिक रूप से सबसे मुश्किल जगह माना जाता है। कई टास्क और झगड़ों में कंटेस्टेंट टूट जाते हैं, लेकिन गौरव ने पूरे सीज़न में खुद को स्टेबल रखा। कई बार उन्हें उकसाया गया, मगर वे विचलित नहीं हुए। दबाव में शांत रहना उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।
7. साफ-सुथरा गेम खेला
शो में गुटबाज़ी, प्लानिंग और बैकस्टैबिंग आम बात है। लेकिन गौरव इन सब से दूर रहे। उन्होंने कभी गलत तरीके से गेम नहीं खेला, न किसी का भरोसा तोड़ा। उनका ट्रांसपेरेंट गेमप्ले दर्शकों को बेहद पसंद आया और लोग उन्हें “क्लीन प्लेयर” कहने लगे।
8. दर्शकों से मजबूत कनेक्शन बना
गौरव ने कोई ओवर-द-टॉप ड्रामा नहीं किया, न ही फुटेज लेने की कोशिश। इसके बावजूद दर्शकों ने उन्हें प्यार दिया क्योंकि उन्हें गौरव में एक रियल, जुड़ाव वाला इंसान दिखा। उनका सादगी भरा अंदाज़, शांत स्वभाव और संतुलित खेल दर्शकों से सीधा कनेक्शन बना गया और यही कनेक्शन उन्हें वोटों से फिनाले में जीतकर ले आया।


