औषधि निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि जिले में कुल चार स्थानों पर छापेमारी की गई,जिसमें कोडीन युक्त दवाओं की अवैध बिक्री और अनुचित भंडारण की शिकायतें सामने आईं,विभाग का कहना है कि आरोपी द्वारा इस तरह की गतिविधियाँ नशे के दुरुपयोग को बढ़ावा देती हैं और यह आपराधिक षड्यंत्र के दायरे में आता है।
इस बीच, यह सवाल भी उठ रहा है कि जब दो मेडिकल फर्मों पर विभाग ने मुकदमा दर्ज करा दिया,तो अमित मेडिकल एजेंसी पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई,अमित मेडिकल एजेंसी से संबंधित खबर प्रसारित होने के बाद एक पत्रकार को धमकी भरे संदेश प्राप्त हुए हैं,स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि एजेंसी का प्रोपराइटर एक बीजेपी नेता का करीबी बताया जाता है।
इस मामले में विभाग के रवैये को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और लोगों में पारदर्शी कार्रवाई की मांग बढ़ गई है।


