पंजाब में ठेकेदारी सिस्टम पर बड़ा प्रहार, हजारों कर्मचारियों को मिलेगा सीधा सरकारी अनुबंध

shikha verma
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पंजाब सरकार ने आउटसोर्स और अस्थायी कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए 65 हजार से अधिक कर्मचारियों को नियमित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिससे राज्य के 51 विभागों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों को पहले सीधे सरकार के साथ अनुबंध पर लाया जाएगा। इसके बाद निर्धारित सेवा अवधि पूरी करने पर उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए सरकार अध्यादेश लाएगी और आगामी विधानसभा सत्र में इससे जुड़े दो विधेयक भी पेश किए जाएंगे।

कैबिनेट ने पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल बिल 2026 और पंजाब कॉन्ट्रैक्चुअल पर्सनल बिल 2026 को विधानसभा में लाने का फैसला किया है। सरकार का दावा है कि इस कदम से ठेकेदारी व्यवस्था पर रोक लगेगी और कर्मचारियों का शोषण कम होगा। नियमितीकरण के बाद कर्मचारियों को सीधे सरकार नियुक्त करेगी तथा उनका वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पहले की सरकारें भी ऐसे विधेयक लेकर आई थीं, लेकिन उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि इस बार व्यवस्था अलग होगी, क्योंकि कर्मचारियों को पहले सरकारी अनुबंध के तहत लाया जाएगा और उसके बाद सेवा अवधि पूरी होने पर उन्हें स्थायी किया जाएगा।

कैबिनेट बैठक में जोखिम भरे कार्यों में लगे कर्मचारियों को भी बड़ी राहत दी गई है। अग्निशमन विभाग के कर्मियों, सीवर कर्मचारियों और लाइनमैन जैसे पदों पर कार्यरत लोगों को अब पांच साल की बजाय केवल तीन साल की सेवा के बाद नियमित किया जा सकेगा।

इसके अलावा, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित बकाया तथा महंगाई भत्ते से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक विशेष कैबिनेट उप-समिति के गठन को भी मंजूरी दी गई है। वहीं भ्रष्टाचार के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य में सात नए विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्णय भी लिया गया है। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से कर्मचारियों को अधिक सुरक्षा मिलेगी और प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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