हिमाचल प्रदेश के शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) में डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल मेडिकल केस को सफलतापूर्वक हल करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां एक 27 वर्षीय युवक के फेफड़े में पिछले तीन वर्षों से फंसे लोहे के पेच को ब्रोंकोस्कॉपी तकनीक की मदद से महज 7 मिनट में निकाल दिया गया।
लंबे समय से खांसी से परेशान था मरीज
सिरमौर जिले के कुलथिना निवासी यह युवक लंबे समय से लगातार खांसी की समस्या से परेशान था। उसने इस दौरान कई निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन समस्या का सही कारण पता नहीं चल सका। एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य जांचों में भी बीमारी की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई।
जांच में सामने आया फेफड़े में धातु का टुकड़ा
जब मरीज IGMC के पल्मोनरी विभाग पहुंचा तो विस्तृत जांच के दौरान डॉक्टरों ने ब्रोंकोस्कॉपी कराने की सलाह दी। जांच में पता चला कि उसके दाहिने निचले फेफड़े के ब्रोंकस में लोहे का एक पेच फंसा हुआ था, जिससे लगातार संक्रमण और खांसी की समस्या हो रही थी।
7 मिनट में सफल प्रक्रिया
डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने बिना किसी बड़ी सर्जरी के ब्रोंकोस्कॉपी तकनीक की मदद से इस पेच को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। करीब एक इंच लंबे इस धातु के टुकड़े को निकालने में केवल 7 मिनट का समय लगा। प्रक्रिया पूरी तरह सफल रही और मरीज अब पहले से काफी स्वस्थ है।
मरीज को याद नहीं कब निगला पेच
हैरानी की बात यह है कि युवक को यह याद नहीं कि उसने यह पेच कब निगला था या यह उसके शरीर में कैसे पहुंचा। लंबे समय तक सही कारण न मिलने के कारण वह कई महीनों तक इलाज के लिए भटकता रहा।
मेडिकल टीम की सराहना
इस सफल प्रक्रिया में डॉक्टरों की टीम में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और तकनीकी स्टाफ शामिल रहे। अस्पताल प्रशासन ने इस सफलता को बड़ी उपलब्धि बताते हुए टीम की सराहना की है।
IGMC शिमला की यह सफलता आधुनिक चिकित्सा तकनीक और डॉक्टरों की विशेषज्ञता का बेहतरीन उदाहरण है, जिसने एक मरीज को तीन साल पुरानी परेशानी से राहत दिलाई।

