धर्म नगरी वाराणसी में 3 अप्रैल को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला, जब सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित भव्य महानाट्य का मंचन किया गया। इस विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
तीन दिवसीय इस आयोजन में हजारों दर्शकों ने भाग लिया और सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, सुशासन, अनुशासन और साहस से जुड़े दृश्यों का सजीव अनुभव किया। मंच पर घोड़े और हाथियों के साथ प्रस्तुत किए गए भव्य दृश्य दर्शकों के लिए बेहद रोमांचकारी रहे।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली इतिहास लगभग 2000 वर्ष पुराना है, जो दानशीलता, पराक्रम और उत्कृष्ट शासन व्यवस्था का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश की राजनीतिक दिशा सकारात्मक रूप से बदल रही है, और मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश मिलकर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस आयोजन को केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों और आदर्शों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण अभियान बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त करती है और काशी व उज्जैन जैसी पवित्र धरती को सांस्कृतिक रूप से जोड़ती है।
योगी आदित्यनाथ ने काशी को बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी बताते हुए उज्जैन को महाकाल की भूमि कहा, और दोनों के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि भर्तृहरि और विक्रमादित्य की जोड़ी भारतीय परंपरा में विशेष स्थान रखती है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को एक विशेष “वैदिक घड़ी” भेंट की, जो प्राचीन वैदिक समय गणना और आधुनिक विज्ञान का संगम है। यह पहल भारतीय परंपरा को वर्तमान समय में पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

