इंदौर (Indore) वनमंडल में हाल ही में बाघों के पंजों के निशान मिलने के बाद जंगलों में हलचल तेज हो गई है। इन निशानों ने न सिर्फ वन विभाग की चिंता बढ़ाई, बल्कि उम्मीद भी जगा दी कि इंदौर के जंगलों में बाघों की संख्या पहले से ज्यादा हो सकती है। इसी के चलते अब इंदौर वनमंडल की चार रेंज की 14 बीटों में बाघों की गणना का काम शुरू कर दिया गया है। जैसे ही पंजों के स्पष्ट निशान मिले, वन विभाग ने बिना देरी किए पूरी तैयारी के साथ गणना प्रक्रिया शुरू कर दी। यह कदम न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम है, बल्कि मध्य प्रदेश की ‘टाइगर स्टेट’ पहचान को और मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा माना जा रहा है।
चार रेंज, 14 बीट और 8 दिन का विशेष अभियान
वन विभाग के अनुसार, इंदौर वनमंडल में बाघों की गणना का यह अभियान करीब 8 दिनों तक चलेगा। इसके बाद अगले 15 दिनों में पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति और संरक्षण योजनाओं पर काम किया जाएगा। जिन 14 बीटों में गणना की जा रही है, वहां पहले ही बाघों के पंजों के निशान साफ तौर पर देखे जा चुके हैं। इन्हीं इलाकों को संवेदनशील मानते हुए वन विभाग ने यहां विशेष निगरानी बढ़ा दी है।
मानपुर, चोरल और महू के जंगलों में लगे नाइट विजन कैमरे
बाघों की गणना को सटीक बनाने के लिए वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। मानपुर, चोरल और महू के जंगलों में करीब 1500 नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं। ये कैमरे दिन के साथ-साथ रात में भी बाघों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे। इसके अलावा महू, देवास और बड़वाह तक फैले जंगलों की सीमा में 200 से अधिक अतिरिक्त नाइट विजन कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों से न केवल बाघों की मौजूदगी दर्ज होगी, बल्कि उनकी मूवमेंट और ट्रैकिंग में भी मदद मिलेगी।
मॉकड्रिल में भी मिली थी बाघों की मौजूदगी
वन विभाग की ओर से पहले कराई गई मॉकड्रिल में भी बाघों की मौजूदगी के संकेत मिले थे। यही वजह रही कि विभाग ने इसे हल्के में न लेते हुए तुरंत गणना का फैसला किया। हम देख रहे हैं कि मॉकड्रिल के दौरान मिले इनपुट्स ने यह साफ कर दिया था कि इंदौर वनमंडल के जंगल बाघों के लिए अनुकूल बन रहे हैं। ऐसे में समय रहते गणना शुरू करना बेहद जरूरी था, ताकि सही आंकड़े सामने आ सकें।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के तहत हो रही गणना
बाघों की गणना राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। NTCA हर चार साल में देशभर में बाघों की गणना कराता है और इसी प्रक्रिया के तहत इंदौर वनमंडल को भी शामिल किया गया है। हम यह भी जानते हैं कि NTCA की गणना पद्धति बेहद वैज्ञानिक और सख्त होती है। इसमें कैमरा ट्रैप, पंजों के निशान, स्कैट एनालिसिस और फील्ड ऑब्जर्वेशन जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बाघों की वास्तविक संख्या सामने आ पाती है।
बाघों की संख्या बढ़ी तो एमपी के लिए बड़ी खुशखबरी
अगर इंदौर वनमंडल में बाघों की संख्या अच्छी निकलती है, तो यह मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। एमपी पहले ही टाइगर स्टेट के रूप में जाना जाता है और इंदौर जैसे नए इलाकों में बाघों की मौजूदगी इस पहचान को और मजबूत करेगी। हम मानते हैं कि इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इको-टूरिज्म की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार और जागरूकता दोनों को फायदा हो सकता है।
तेंदुआ और भेड़िया भी आएंगे कैमरों में
यह गणना अभियान सिर्फ बाघों तक सीमित नहीं है। वन विभाग ने साफ किया है कि इन्हीं नाइट विजन कैमरों की मदद से तेंदुआ और भेड़िया जैसे अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीवों की भी गिनती की जाएगी। इसके अलावा जंगल में मौजूद अन्य प्रजातियों की जानकारी भी जुटाई जाएगी। इसके लिए इंदौर वन विभाग ने अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जो विशेष जिम्मेदारी के साथ काम कर रही हैं।


