झारखंड में मानसून के साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) का कहर लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। पिछले 15 दिनों में राज्य में 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
कई जिलों में लगातार हादसे
12 जून से अब तक रांची, लोहरदगा, गढ़वा, पलामू, जामताड़ा और अन्य जिलों में बिजली गिरने की कई घटनाएं सामने आई हैं। रविवार को रांची के सोनाहातू में वॉच टावर का निरीक्षण कर रहे वनरक्षक की वज्रपात से मौत हो गई, जबकि दो अन्य कर्मचारी झुलस गए।
लोहरदगा में तीन वर्षीय बच्ची, रांची में एक किसान, सिल्ली में एक नाबालिग और गढ़वा में आम तोड़ने गए दो बच्चों की भी जान बिजली गिरने से चली गई।
खेल मैदान और खुले इलाकों में भी हादसे
पिछले कुछ दिनों में खेल के मैदानों में भी वज्रपात की घटनाएं हुई हैं। चतरा, पलामू, जामताड़ा, देवघर और कोडरमा सहित कई जिलों में गंभीर हादसे हुए, जिनमें खिलाड़ियों और ग्रामीणों की मौतें शामिल हैं।
भौगोलिक स्थिति बनी बड़ी वजह
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड की भौगोलिक संरचना इसे वज्रपात के लिए अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। पठारी क्षेत्र, घने जंगल और मानसून के दौरान गर्म-ठंडी हवाओं के टकराव से वातावरण में तेजी से बिजली का निर्माण होता है।
लगातार बढ़ रही घटनाएं
मौसम विभाग और वैज्ञानिक संस्थानों के अनुसार, राज्य में हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की जाती हैं। पिछले एक दशक में वज्रपात से 1,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
मौसम विभाग का अलर्ट
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने झारखंड के कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों से अपील की गई है कि वे गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों, पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों से दूर रहें।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम खराब होने पर बाहर न निकलने की सलाह दी है।


