मोतीलाल नेहरू राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध मंडलीय चिकित्सालय ‘स्वरूप रानी नेहरू’ (SRN अस्पताल) का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय’ किए जाने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को 10वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन का नेतृत्व महुआ डाबर संग्रहालय परिवार कर रहा है।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जिस स्थान पर आज SRN अस्पताल स्थित है, वहां कभी मलाका जेल हुआ करती थी। इसी जेल में काकोरी कांड के अमर क्रांतिकारी ठाकुर रोशन सिंह को बंद रखा गया था। 19 दिसंबर 1927 को उन्होंने देश की आजादी के लिए इसी स्थान पर फांसी का फंदा चूमकर सर्वोच्च बलिदान दिया था।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस धरती पर ठाकुर रोशन सिंह ने देश के लिए अपना जीवन न्योछावर किया, उस स्थान को उनके नाम और बलिदान से स्थायी पहचान मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से SRN अस्पताल के नामकरण की मांग उठाई जा रही है।
बलिदान स्थल को मिले ऐतिहासिक पहचान
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि ठाकुर रोशन सिंह करीब आठ महीने तक मलाका जेल में फांसीघर के निकट स्थित काल कोठरी में बंद रहे। 19 दिसंबर 1927 की सुबह उन्होंने निर्भीकता के साथ फांसी के फंदे को चूमकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इस ऐतिहासिक स्थल पर अस्पताल का निर्माण हो गया, लेकिन समय के साथ ठाकुर रोशन सिंह से जुड़ी स्मृतियां लोगों की यादों से धुंधली होती चली गईं। ऐसे में अस्पताल का नाम उनके नाम पर किया जाना उनके बलिदान को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
सरकार से तत्काल नामकरण की मांग
आंदोलनकारियों ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के अवसर पर ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान स्थल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना जरूरी है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि SRN अस्पताल का नाम बदलकर ‘अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह चिकित्सालय’ किए जाने के प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, अस्पताल के नाम के माध्यम से प्रतिदिन यहां आने वाले हजारों लोगों को भी ठाकुर रोशन सिंह के जीवन, संघर्ष और बलिदान की जानकारी मिलेगी। इससे नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
19 दिसंबर से शुरू होगा बलिदान का शताब्दी वर्ष
धरने में वक्ताओं ने कहा कि आगामी 19 दिसंबर से ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान का शताब्दी वर्ष शुरू होने जा रहा है। ऐसे समय में उनके बलिदान स्थल को सम्मान और स्थायी ऐतिहासिक पहचान दिलाने की मांग और महत्वपूर्ण हो जाती है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि पूर्व की सरकारों से जो चूक हुई, उसे अब सुधारा जाना चाहिए। प्रयागराज की ऐतिहासिक धरती पर अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह की स्मृति को स्थायी पहचान मिलना उनके बलिदान के प्रति सच्चा सम्मान होगा।
छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताया समर्थन
धरने के 10वें दिन छात्र, युवा, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक आंदोलन के समर्थन में पहुंचे। इस दौरान डॉ. शाह आलम राना, डॉ. अवनीश सिंह, सौरभ तिवारी, भीष्म सिंह, सोनू चौधरी, आयुष मिश्रा, सुजीत मौर्या, आकाश द्विवेदी और सुनील केसरवानी समेत कई वक्ताओं ने विचार रखे और ठाकुर रोशन सिंह के नाम पर SRN अस्पताल के नामकरण की मांग का समर्थन किया।


