शिमला में दृष्टिहीन जन संगठन पिछले 918 दिनों से अपनी लंबित मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहा है। सरकार की कथित अनदेखी से नाराज होकर मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने राज्य सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया, जिसके कारण शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अर्धनग्न होकर विरोध भी किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि कई दौर की वार्ताओं के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
दृष्टिहीन जन संगठन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि वे लंबे समय से सरकारी विभागों में दृष्टिबाधितों के लिए आरक्षित बैकलॉग पदों को भरने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार केवल आश्वासन देती रही है।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व सरकार द्वारा शुरू की गई ‘सहारा योजना’ के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता को वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया है। साथ ही ‘हिम बस कार्ड’ के लिए शुल्क वसूले जाने का भी विरोध किया गया है, जिसे उन्होंने दिव्यांगों के हितों के खिलाफ बताया।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, वर्ष 1995 के बाद से उनके आरक्षित पदों पर भर्ती नहीं हुई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। उनका दावा है कि विभिन्न विभागों में 1100 से अधिक पद अभी भी खाली पड़े हैं।
दृष्टिहीन संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

