राज्यसभा चुनाव विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, मीनाक्षी नटराजन मामले पर आज फैसला संभव

shikha verma
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मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके हैं। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।

कांग्रेस का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन बिना पर्याप्त कानूनी आधार के और राजनीतिक कारणों से रद्द किया गया। पार्टी ने इस फैसले को चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों के समक्ष चुनौती दी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को शिकायत दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इससे पहले गुरुवार को सुनवाई के दौरान कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि नामांकन गलत कानूनी आधार पर खारिज किया गया था।

भाजपा का पक्ष है कि नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामे में आवश्यक जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके कारण यह कार्रवाई की गई।

नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। ऐसे में अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत यदि नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया में गंभीर त्रुटि पाती है तो वह उचित आदेश दे सकती है, हालांकि चुनाव प्रक्रिया पूरी हो जाने के कारण मामला जटिल हो गया है।

इस विवाद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

विवाद का केंद्र हैदराबाद में लंबित एक निजी शिकायत है, जिसका उल्लेख मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया था। कांग्रेस का दावा है कि यह मामला न तो उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर था और न ही ऐसा कोई प्रकरण था जिसमें अदालत ने आरोप तय किए हों। इसलिए इसे नामांकन रद्द करने का आधार बनाना कानून की गलत व्याख्या है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस स्तर पर हस्तक्षेप करेगी या कांग्रेस को चुनाव याचिका जैसे अन्य कानूनी विकल्प अपनाने होंगे।

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