दिल्ली में लगभग दो साल बाद INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। 2024 के बाद पहली बार हुई इस बैठक में 23 विपक्षी दल शामिल हुए। गठबंधन ने अपनी एकजुटता मजबूत करने के लिए हर दो महीने में नियमित बैठक करने का फैसला किया है।
बैठक में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रूप से कदम उठाने का निर्णय लिया। इसके अलावा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को भी समर्थन दिया गया।
गठबंधन ने आगामी संसद सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अध्यक्षता में प्रतिदिन विपक्षी दलों की बैठक आयोजित करने का फैसला किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे INDIA गठबंधन के भीतर राहुल गांधी की नेतृत्व भूमिका और मजबूत हो सकती है।
बैठक में यह भी स्पष्ट हुआ कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस दोनों को एक-दूसरे की आवश्यकता है। कई राज्यों में कांग्रेस की सीमित उपस्थिति और क्षेत्रीय दलों की कमजोर होती स्थिति को देखते हुए सहयोग की राजनीति पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
विशेषज्ञों ने तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से प्रतिनिधित्व न होने को गठबंधन के लिए चिंता का विषय बताया। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी और कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनकी नजदीकी को विपक्षी एकता के संकेत के रूप में देखा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और युवाओं के बीच उभरते असंतोष ने विपक्षी दलों को अधिक संगठित होने के लिए प्रेरित किया है। ऐसे में नियमित बैठकें और साझा रणनीति INDIA गठबंधन के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
गठबंधन की अगली बैठक 1 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।


