90 के दशक का भारतीय टेलीविजन सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उस दौर के कई धारावाहिक समाज, संस्कृति और साहित्य को बेहद संवेदनशील तरीके से पेश करते थे। इन्हीं में एक नाम था ‘मुल्ला नसरुद्दीन’, जिसने अपनी सादगी, व्यंग्य और गहरी बातों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।
साल 1990 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ यह शो आज भी अपनी दमदार कहानी और तर्कपूर्ण प्रस्तुति के लिए याद किया जाता है। आईएमडीबी पर इसे 8.9 की शानदार रेटिंग मिली हुई है, जो इसकी लोकप्रियता और गुणवत्ता को दर्शाती है।
लोक कथाओं से प्रेरित था किरदार
मुल्ला नसरुद्दीन का किरदार दुनिया भर की लोक कथाओं में मशहूर रहा है। उन्हें एक बुद्धिमान और हाजिरजवाब व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जो अपनी सूझबूझ से मुश्किल हालात का हल निकाल लेते थे। शो में हास्य के साथ-साथ समाज को आईना दिखाने वाली बातें भी शामिल थीं।
रघुबीर यादव ने निभाया यादगार किरदार
आज रघुबीर यादव को लोग वेब सीरीज ‘पंचायत’ के ‘प्रधान जी’ के रूप में पहचानते हैं, लेकिन ‘मुल्ला नसरुद्दीन’ में उनके अभिनय को आज भी बेहतरीन माना जाता है। उन्होंने अपने अभिनय से किरदार को इतना जीवंत बना दिया था कि दर्शकों को वह असली मुल्ला नसरुद्दीन जैसे लगने लगे।
व्यंग्य के जरिए समाज पर कटाक्ष
इस शो की सबसे खास बात इसका व्यंग्य था। हर एपिसोड में हल्के-फुल्के अंदाज में सामाजिक कुरीतियों, सत्ता के अहंकार और इंसानी कमजोरियों पर चोट की जाती थी। शो यह संदेश देता था कि बुद्धिमानी और हास्य के जरिए बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
सिर्फ 13 एपिसोड, लेकिन गहरी छाप
दिलचस्प बात यह है कि इस चर्चित धारावाहिक के केवल 13 एपिसोड ही बनाए गए थे, लेकिन इतने कम समय में भी इसने भारतीय टीवी इतिहास में अपनी अलग पहचान बना ली।
इन कलाकारों ने भी निभाई अहम भूमिका
इस शो का निर्देशन अमल अल्लाना ने किया था। वहीं संगीत लुई बैंक्स ने तैयार किया। स्क्रिप्ट लेखन एस. एम. मेहदी ने किया था। शो में सौरभ शुक्ला, मनोहर सिंह और युसुफ हुसैन जैसे कलाकार भी नजर आए थे। आज भी यह शो उन क्लासिक धारावाहिकों में गिना जाता है, जो मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करते हैं।

