लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर एक दो मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि नौ अन्य लोग घायल हो गए। मृतकों में अधिकांश की उम्र 19 से 30 वर्ष के बीच थी। हादसे में तीन महिलाओं की भी जान गई।
मृतकों में 23 वर्षीय सुखमणि भी शामिल थे। उनके पिता प्रभुज्योत सिंह ने बताया कि आग लगने के दौरान बेटे ने फोन कर कहा था, “पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो।” परिवार जब तक मौके पर पहुंचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
19 वर्षीय मोहम्मद शाजान, जो एनीमेशन प्रशिक्षण ले रहे थे, भी इस हादसे का शिकार हो गए। उनके परिजनों के अनुसार आग लगने के समय वह दूसरी मंजिल पर मौजूद थे। वहीं 22 वर्षीय अब्दुल रहमान, जो परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य थे, की भी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक आग सबसे पहले इमारत के निचले हिस्से में स्थित पेट शॉप में लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गई। कई लोग अंदर फंस गए और खिड़कियों से मदद की गुहार लगाते रहे। कुछ लोगों ने बिजली और इंटरनेट के तारों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था न होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जिससे लोगों को बच निकलने का मौका नहीं मिला।
हालांकि लखनऊ के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अंकुश मित्तल ने कहा कि सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल की गाड़ियां रवाना कर दी गई थीं और निर्धारित समय के भीतर घटनास्थल पर पहुंच गई थीं।
मामले में इमारत मालिक समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि भवन में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये तथा गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का एलान किया गया है।


