लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने हादसे वाली इमारत के मालिकों को ध्वस्तीकरण का नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वे स्वयं भवन को गिरा दें, अन्यथा प्राधिकरण इसे जमींदोज कर देगा।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भूखंड पर यह इमारत बनाई गई थी, वह आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था। वर्ष 2014 में आवासीय नक्शा पास कराया गया था, लेकिन बाद में वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाने लगीं। नियमों के अनुसार भवन में निर्धारित सेटबैक और खुला क्षेत्र होना चाहिए था, लेकिन निर्माण में कई मानकों का पालन नहीं किया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि इमारत में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जबकि व्यावसायिक भवनों में कम से कम दो निकास मार्ग आवश्यक होते हैं। मुख्य मार्ग पर एयर कंडीशनर की बाहरी यूनिटें भी लगी थीं, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलना और मुश्किल हो गया।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2016 में इस भवन को अवैध घोषित किया गया था, लेकिन बाद में दस्तावेजी प्रक्रिया के जरिए इसे नियमित कर दिया गया। बिजली व्यवस्था में भी गंभीर अनियमितताओं और निम्न गुणवत्ता के उपकरणों के उपयोग की बात सामने आई है।
हादसे के दौरान एनिमेशन सेंटर के निकास द्वार पर लगे बायोमेट्रिक सिस्टम के कारण लोगों के बाहर निकलने में दिक्कत आने की भी जानकारी मिली है। इसके अलावा भवन का अग्रभाग लगभग पूरी तरह बंद होने से धुआं और गर्मी तेजी से अंदर फैल गई।
हालांकि भवन की ऊंचाई 15 मीटर से कम होने के कारण फायर एनओसी अनिवार्य नहीं थी, लेकिन सुरक्षा मानकों की कमी को हादसे का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।


