मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को देश और दुनिया का प्रमुख टेक्सटाइल हब बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि ‘यूपी’ का मतलब ‘अल्टीमेट पोटेंशियल’ है। प्रदेश के पास समृद्ध विरासत, हुनरमंद कारीगर, विशाल मानव संसाधन, उद्यमिता और देश का सबसे बड़ा बाजार मौजूद है। अब इन्हीं क्षमताओं के दम पर उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को नई औद्योगिक ताकत के रूप में विकसित किया जाएगा।
- फाइबर से ग्लोबल ब्रांड तक वैल्यू चेन विकसित करने का लक्ष्य
- 7 लाख से अधिक बुनकरों की ताकत
- 2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य में यूपी की अहम भूमिका
- कारीगर सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें
- टेक्निकल टेक्सटाइल पर सरकार का फोकस
- निवेश के लिए मजबूत हुआ यूपी का माहौल
- सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक ताकत में बदलने की तैयारी
मुख्यमंत्री योगी मंगलवार को आयोजित दो दिवसीय यूपी टेक्सटाइल्स कॉन्क्लेव-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी टेक मित्र पोर्टल लॉन्च किया और हथकरघा बुनकर समृद्धि योजना का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़े 5,196 करोड़ रुपये के नए निवेश प्रस्तावों पर एमओयू किए गए। इसके अलावा 163 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी किए गए और 60 करोड़ रुपये की सब्सिडी वितरित की गई।
फाइबर से ग्लोबल ब्रांड तक वैल्यू चेन विकसित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश का लक्ष्य फाइबर से यार्न, यार्न से फैब्रिक, फैब्रिक से गारमेंट और गारमेंट से ब्रांड तक की पूरी वैल्यू चेन को प्रदेश में विकसित करना है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन के साथ-साथ डिजाइन, ब्रांडिंग और निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की टेक्सटाइल पहचान हजारों वर्ष पुरानी है। वैदिक साहित्य के साथ-साथ रामायण और महाभारत में भी काशी के रेशमी वस्त्रों का उल्लेख मिलता है। आज वाराणसी की सिल्क साड़ी, भदोही का कारपेट, लखनऊ की चिकनकारी, बरेली की जरी और कानपुर का टेक्सटाइल इकोसिस्टम प्रदेश की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं मेरठ में टेक्निकल टेक्सटाइल के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं हैं।
7 लाख से अधिक बुनकरों की ताकत
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में करीब दो लाख हैंडलूम और पांच लाख से अधिक पावरलूम बुनकर टेक्सटाइल सेक्टर की रीढ़ हैं। कृषि के बाद वस्त्र उद्योग रोजगार उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े क्षेत्रों में शामिल है।
उन्होंने बताया कि फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग में उत्तर प्रदेश देश में तीसरे स्थान पर है और देश के कुल फैब्रिक उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 13 से 14 प्रतिशत है। पिछले छह वर्षों में उत्तर प्रदेश के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसके साथ ही यूपी इस क्षेत्र में देश का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में गौतमबुद्ध नगर से 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ, जिससे यह देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर पहुंच गया।
2030 के राष्ट्रीय लक्ष्य में यूपी की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2030 तक देश की टेक्सटाइल और अपैरल इकोनॉमी को 350 अरब अमेरिकी डॉलर और टेक्सटाइल निर्यात को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता के साथ इस राष्ट्रीय लक्ष्य में योगदान देगा।
उन्होंने कहा कि ओडीओपी योजना के जरिए प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के वस्त्र और हैंडलूम उत्पादों को नई पहचान मिली है। यूपी के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं भी टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
कारीगर सप्लायर नहीं, अपने ब्रांड के मालिक बनें
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के एमएसएमई केवल सब-कॉन्ट्रैक्टर बनकर न रहें, बल्कि ग्लोबल वैल्यू चेन के पार्टनर बनें। इसी तरह युवा केवल नौकरी तलाशने वाले न हों, बल्कि टेक्सटाइल सेक्टर में एंटरप्रेन्योर और इनोवेटर के रूप में आगे आएं।
उन्होंने कारीगरों का आह्वान करते हुए कहा कि वे केवल सप्लायर की भूमिका तक सीमित न रहें, बल्कि अपने उत्पादों की ब्रांडिंग कर ब्रांड ओनर बनें। इसके लिए ‘डिजाइन इन यूपी, मेड इन यूपी और एक्सपोर्टेड फ्रॉम यूपी’ के मंत्र को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
टेक्निकल टेक्सटाइल पर सरकार का फोकस
योगी ने कहा कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री अब केवल कपड़े और फैशन तक सीमित नहीं है। डिफेंस, हेल्थकेयर, कृषि और स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में टेक्निकल टेक्सटाइल की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश को पारंपरिक टेक्सटाइल के साथ-साथ टेक्निकल टेक्सटाइल में भी अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।
उन्होंने बताया कि पीएम मित्रा पार्क और संत कबीर टेक्सटाइल पार्क जैसी परियोजनाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संतकबीरनगर और बिजनौर में परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। वहीं सीतापुर, मऊ, कानपुर, झांसी और रायबरेली में टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। नोएडा को अपैरल सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
निवेश के लिए मजबूत हुआ यूपी का माहौल
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल नीतियों के चलते उत्तर प्रदेश में कारोबारी माहौल तेजी से बदला है। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए 36 सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं।
उन्होंने कहा कि देश के करीब 55 प्रतिशत मोबाइल और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह रणनीतिक नोड में 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा प्रदेश में एमएसएमई के 12 प्लेज पार्क भी तैयार किए जा रहे हैं।
सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक ताकत में बदलने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और मार्केट के स्तर पर खुद को तैयार कर चुका है। अब प्रदेश की सांस्कृतिक पूंजी को आर्थिक पूंजी में बदलने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बुनकरों के हुनर, उद्यमियों के कारोबार, युवाओं के रोजगार, महिलाओं की भागीदारी, निवेश और निर्यात को बढ़ावा देकर उत्तर प्रदेश को दुनिया के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में स्थापित किया जाएगा।
कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग मंत्री राकेश सचान, उत्तर प्रदेश ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव वस्त्र उद्योग अनिल कुमार सागर समेत देशभर से आए प्रमुख उद्यमी, निवेशक, निर्यातक और टेक्सटाइल सेक्टर के प्रतिनिधि मौजूद रहे।


