उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से 2021 के बीच माफ किए गए करीब 13 लाख वाहन चालानों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकार ने गंभीर यातायात उल्लंघनों से जुड़े मामलों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिसके बाद कई चालान फिर से सक्रिय किए जा सकते हैं।
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर अपराधों से संबंधित चालानों को एकमुश्त माफ किए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने परिवहन विभाग को ऐसे मामलों की समीक्षा करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जिला स्तर पर बनेगी समीक्षा समिति
परिवहन विभाग ने चालानों की जांच के लिए प्रत्येक जिले में समितियां गठित करने का निर्णय लिया है। ये समितियां पहले माफ किए गए चालानों की समीक्षा करेंगी और तय करेंगी कि किन मामलों को दोबारा सक्रिय किया जाना चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, माफ किए गए मामलों में लगभग 4 लाख चालान ऐसे हो सकते हैं जिनमें जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पड़ सकती है।
तीन श्रेणियों में होगी जांच
सरकार ने समीक्षा के लिए चालानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा है:
- गैर-शमनीय (Non-Compoundable) अपराध
- बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले मामले
- ऐसे मामले जिनमें जेल की सजा का प्रावधान या आदेश शामिल है
इन श्रेणियों में आने वाले चालानों की विशेष रूप से जांच की जाएगी।
वाहन चालकों पर पड़ सकता है असर
यदि समीक्षा के बाद कोई चालान दोबारा सक्रिय किया जाता है, तो संबंधित वाहन मालिकों को निर्धारित जुर्माना जमा करना पड़ सकता है। नियमों के अनुसार आवश्यक होने पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
पहले क्यों माफ किए गए थे चालान?
राज्य सरकार ने 2017 से 2021 के बीच बड़ी संख्या में लंबित ई-चालानों को समाप्त करने का निर्णय लिया था। उस दौरान लाखों वाहन चालकों को राहत मिली थी। हालांकि अब गंभीर मामलों को इस राहत के दायरे से बाहर रखने पर विचार किया जा रहा है।
कितने चालानों की होगी समीक्षा?
अधिकारियों के अनुसार, संबंधित अवधि में 30 लाख से अधिक ई-चालान जारी किए गए थे। इनमें से लगभग 17.59 लाख मामलों का निस्तारण हो चुका है, जबकि करीब 13 लाख चालानों को माफी के दायरे में शामिल किया गया था।
अब सरकार के नए निर्देशों के तहत इन मामलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी और गंभीर उल्लंघनों से जुड़े चालानों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


