दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में 36 दिनों तक चला प्रदर्शन सरकार से बातचीत के बाद समाप्त हो गया है। हालांकि, प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो और घटनाएं अब भी चर्चा में हैं।
इन्हीं में एक 15 वर्षीय छात्रा का मामला सामने आया है, जिसका प्रदर्शन के दौरान बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के बाद उसे सोशल मीडिया पर लगातार धमकियां मिलने लगीं। छात्रा का कहना है कि उसे जान से मारने, यौन हिंसा और तेज़ाब फेंकने जैसी धमकियां दी गईं। उसका मोबाइल नंबर भी कथित रूप से सार्वजनिक कर दिया गया, जिसके बाद उसे लगातार कॉल और संदेश मिलने लगे।
छात्रा के अनुसार, वह 22 जुलाई को दोस्तों और सोशल मीडिया से मिली जानकारी के आधार पर प्रदर्शन में शामिल हुई थी। उसका कहना है कि वहां मौजूद कुछ लोगों के प्रभाव में आकर उसने ऐसी बातें कह दीं, जिनका उसे बाद में पछतावा हुआ।
धमकियों के कारण छात्रा और उसकी मां 26 जुलाई से अपना घर छोड़कर दूसरी जगह रह रहे हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक यह नहीं पता कि वे सुरक्षित रूप से अपने घर कब लौट पाएंगे।
इस मामले में प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। नोएडा पुलिस ने पहले ज़ीरो एफआईआर दर्ज की, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराएं लगाई गईं। बाद में शिकायतकर्ता वकील स्मृति सिंह चंदेल ने अपनी शिकायत वापस ले ली। उनका कहना था कि जब प्रधानमंत्री ने बच्चों को माफ़ करने की बात कही, तो उन्होंने भी शिकायत वापस लेने का फैसला किया।
1 अगस्त को छात्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने कहा कि यह उसकी पहली और आखिरी गलती थी तथा वह प्रदर्शन में मौजूद कुछ समूहों के प्रभाव में आ गई थी। उसने अपने शब्दों पर खेद व्यक्त करते हुए देश से क्षमा मांगी।
बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बच्चे गलतियां करते हैं और उन्हें सुधारने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने अपमानजनक भाषा की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे बच्चों को सही दिशा दिखाने की आवश्यकता है और उन्होंने उन्हें माफ़ करने की बात कही।


