उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से जागरूक बनाने के लिए “साइबर पंचायत” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधों से बचाव के तरीके सिखाना और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना रहा।
यह कार्यक्रम सरोजिनी नगर के हसनपुर खेवली स्थित प्राथमिक विद्यालय में आयोजित किया गया, जिसे साइनेरी वेलफेयर फाउंडेशन ने आरटी साइबर अकैडमी के सहयोग से आयोजित किया। कार्यक्रम में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।
विशेषज्ञों ने लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया दुरुपयोग और बैंकिंग साइबर ठगी जैसे मामलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह अपराधी कम पैसों का लालच देकर ग्रामीणों के बैंक खाते और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करते हैं, जिससे लोग अनजाने में कानूनी मुश्किलों में फंस जाते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान लिंक, कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और हमेशा सतर्क रहें। उन्होंने कहा कि जागरूकता ही साइबर अपराध से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आर्ची अनुराज ने भी लोगों को तनाव, चिंता, अकेलापन और डिजिटल निर्भरता से होने वाले मानसिक प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि संतुलित डिजिटल उपयोग और खुली बातचीत मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
इस दौरान साइबर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई, जिससे लोगों को विषय को समझने में मदद मिली।
आयोजकों ने कहा कि “साइबर पंचायत” का उद्देश्य ग्रामीणों को डिजिटल युग के खतरों से सुरक्षित बनाना और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत करना है। इससे पहले भी इसी क्षेत्र में ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है, जिसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला था।

