झुग्गी हटाने पर बड़ा फैसला, दिल्ली हाई कोर्ट ने रखी शर्तें

shikha verma
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दिल्ली हाई कोर्ट ने झुग्गी बस्तियों को हटाने और उनके पुनर्वास को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) की नीति और तय नियमों का पालन किया जाता है, तो झुग्गीवासियों को हटाकर दूसरी जगह बसाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।

यह मामला राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के निवासियों की याचिकाओं से जुड़ा था। इन लोगों ने अपने पुनर्वास के लिए सवदा घेवरा भेजे जाने का विरोध किया था। उनका कहना था कि नई जगह उनके कार्यस्थल और बच्चों के स्कूल से काफी दूर है, जिससे उनकी आजीविका और शिक्षा पर असर पड़ेगा।

सरकारी एजेंसियों ने अदालत को बताया कि ये झुग्गियां एयरफोर्स स्टेशन और अन्य संवेदनशील रक्षा क्षेत्र के पास स्थित थीं, इसलिए सुरक्षा कारणों से इन्हें हटाना आवश्यक था। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि पुनर्वास के दौरान सरकार की जिम्मेदारी है कि प्रभावित लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

कोर्ट ने कहा कि जीवन, रोजगार और आश्रय का अधिकार आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन केवल झुग्गी हटाकर पुनर्वास देना अपने आप में अधिकारों का उल्लंघन नहीं है, यदि सरकार उचित व्यवस्था सुनिश्चित करे।

अदालत ने यह भी माना कि अधिकारियों द्वारा सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन नहीं किया गया, लेकिन इससे निवासियों को बड़ा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि अधिकांश को पुनर्वास के लिए पात्र माना गया है और बाद में कमियों को दूर कर दिया गया।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन लोगों ने अभी तक आवंटन पत्र नहीं लिए हैं, वे 15 दिनों के भीतर नई जगह पर शिफ्ट हो जाएं, अन्यथा प्रशासन कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।

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