सीएम योगी ने लॉन्च किया ‘यूपीकोस’, आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगी नौकरी और सामाजिक सुरक्षा की गारंटी

shikha verma
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उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम (यूपीकोस) का विधिवत शुभारंभ किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में निगम का लोगो, पोर्टल और वेबसाइट लॉन्च की। इस दौरान आउटसोर्स कर्मियों को पारिश्रमिक के चेक भी वितरित किए गए।

नई व्यवस्था के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर पूरा पारिश्रमिक, ईपीएफ, ईएसआई और दुर्घटना बीमा समेत सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की व्यवस्था की गई है। सरकार का दावा है कि नई प्रणाली से आउटसोर्सिंग व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारियों के शोषण तथा मनमानी पर रोक लगेगी।

5 तारीख तक सीधे खाते में पहुंचेगा वेतन

यूपीकोस की नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के भुगतान को सीधे बैंक खाते से जोड़ा गया है। अब हर महीने की 5 तारीख तक कर्मचारी के खाते में पूरा पारिश्रमिक पहुंचाने की व्यवस्था होगी।

सरकार के अनुसार, पहले कर्मचारी का पूरा भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और इसके बाद संबंधित एजेंसी को उसका निर्धारित सर्विस चार्ज दिया जाएगा। इससे कर्मचारियों के वेतन से अनधिकृत कटौती की गुंजाइश कम होगी।

हर महीने की 21 तारीख से अगले महीने की 20 तारीख तक कर्मचारी के कार्य और उपस्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि किसी विभाग में बजट की उपलब्धता में देरी होती है, तो भी कर्मचारी का भुगतान प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

एजेंसी मनमाने तरीके से नहीं कर सकेगी छंटनी

नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मियों को मनमानी छंटनी से भी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है। किसी कर्मचारी को हटाने के लिए केवल एजेंसी का निर्णय पर्याप्त नहीं होगा। अनुशासनहीनता या गंभीर शिकायत के मामलों में विभाग और निगम की प्रक्रिया के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।

सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एजेंसी बदलने के बाद भी कार्यरत कर्मचारियों की नौकरी बरकरार रखने की व्यवस्था की गई है। नई एजेंसी को मौजूदा कर्मचारियों को ही सेवा में बनाए रखना होगा।

एजेंसियों का चयन जेम पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई और ब्लैकलिस्ट करने की व्यवस्था भी होगी।

चार श्रेणियों में बांटे गए आउटसोर्स पद

सरकार ने आउटसोर्स पदों और मानदेय को चार श्रेणियों में विभाजित किया है। इससे कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता और पद के अनुरूप पारिश्रमिक तय करने का प्रयास किया गया है।

श्रेणी-1: न्यूनतम मानदेय 40 हजार रुपये

इस श्रेणी में उच्च शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी दक्षता वाले पेशेवर पद शामिल किए गए हैं। इनमें एमबीबीएस डॉक्टर, सहायक अभियंता, प्रोजेक्ट अधिकारी और वरिष्ठ लेखा अधिकारी जैसे पद शामिल हैं।

इन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 40 हजार रुपये मासिक मानदेय निर्धारित किया गया है।

श्रेणी-2: न्यूनतम मानदेय 25 हजार रुपये

स्नातक स्तर की योग्यता और तकनीकी दक्षता वाले पदों को इस श्रेणी में रखा गया है। इसमें स्टाफ नर्स, जूनियर इंजीनियर, सीनियर असिस्टेंट और लीगल असिस्टेंट जैसे पद शामिल हैं।

इन पदों के लिए न्यूनतम 25 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है।

श्रेणी-3: न्यूनतम मानदेय 22 हजार रुपये

इंटरमीडिएट स्तर की योग्यता वाले कर्मचारियों को इस श्रेणी में शामिल किया गया है। इसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर टाइपिस्ट, स्टोरकीपर, इलेक्ट्रीशियन, ड्राइवर, मैकेनिक, लैब असिस्टेंट और पैरामेडिकल स्टाफ जैसे पद शामिल हैं।

इस श्रेणी के लिए न्यूनतम 22 हजार रुपये मासिक मानदेय तय किया गया है।

श्रेणी-4: न्यूनतम मानदेय 20 हजार रुपये

चतुर्थ श्रेणी के जरूरी कार्यों से जुड़े कर्मचारियों को चौथी श्रेणी में रखा गया है। इसमें सफाई कर्मी, स्वीपर, चौकीदार, माली, रसोइया, वार्ड ब्वॉय और अनुसेवक जैसे पद शामिल हैं।

इन कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय निर्धारित किया गया है।

ईपीएफ और ईएसआई का मिलेगा सुरक्षा कवच

यूपीकोस के तहत आउटसोर्स कर्मचारियों को ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। इससे कर्मचारियों को बीमारी, इलाज और भविष्य की सामाजिक सुरक्षा में मदद मिलेगी।

ईएसआई के तहत पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज, दवाओं और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। महिला कर्मचारियों को सवेतन मातृत्व अवकाश सहित वैधानिक लाभ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

ईपीएफ के माध्यम से कर्मचारियों को भविष्य की आर्थिक सुरक्षा देने का भी प्रावधान किया गया है।

दुर्घटना में 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर

आउटसोर्स कर्मचारियों के बैंक सैलरी खाते के साथ दुर्घटना बीमा कवर भी जोड़ा गया है। सरकार के अनुसार दुर्घटना में मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर उपलब्ध होगा।

खास बात यह है कि इसके लिए कर्मचारी को अलग से प्रीमियम देने की आवश्यकता नहीं होगी।

चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के बच्चों के लिए विशेष सहायता

सरकार ने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए भी विशेष प्रावधान किया है।

यदि किसी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बेटे या बेटी का चयन आईआईटी, आईआईएम, एमटेक, मेडिकल या संघ/राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में होता है, तो उसे एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है।

इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित करना है।

भर्ती प्रक्रिया में लागू होगा संवैधानिक आरक्षण

सरकार के मुताबिक भविष्य में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया में एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, दिव्यांगजन और महिलाओं के लिए लागू संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया जाएगा।

भर्ती प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। वहीं एजेंसियों का चयन जेम पोर्टल के जरिए किया जाएगा, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

एक ही पोर्टल पर मिलेगी पूरी जानकारी

यूपीकोस पोर्टल को आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। कर्मचारी यहां भर्ती, जॉइनिंग, उपस्थिति, मानदेय, ईपीएफ, ईएसआई और अन्य सेवा संबंधी जानकारी देख सकेंगे।

इसके अलावा शिकायत दर्ज कराने और उसके निस्तारण की सुविधा भी पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इससे विभाग, सेवा प्रदाता एजेंसी और कर्मचारी एक ही डिजिटल व्यवस्था से जुड़े रहेंगे।

सरकार और कर्मचारी के बीच मजबूत होगा भरोसा

यूपीकोस के जरिए सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों की वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान के लिए एक संस्थागत व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया है। समय पर वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पारदर्शी भर्ती और नौकरी की सुरक्षा जैसे प्रावधानों से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को केवल कामगार के रूप में नहीं, बल्कि सम्मानजनक, सुरक्षित और संगठित कार्यबल के रूप में स्थापित करना है।

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