हरियाणा में सामने आए 590 करोड़ रुपये के कथित IDFC First Bank घोटाले मामले में जांच तेज हो गई है। अब इस केस में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है, क्योंकि हरियाणा सरकार ने 5 IAS अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए CBI को अनुमति दे दी है।
इस कथित घोटाले में सरकारी फंड के दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के जरिए करोड़ों रुपये के हेरफेर के आरोप लगे हैं। मामले में बैंक कर्मचारियों, सरकारी अधिकारियों और कुछ कारोबारियों की मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है।
CBI की लगातार कार्रवाई
जांच एजेंसी CBI पहले ही इस मामले में सक्रिय है और कई जगहों पर छापेमारी कर चुकी है। 14 मई को पंचकुला और चंडीगढ़ में 7 अलग-अलग ठिकानों पर रेड की गई थी, जिसमें दफ्तरों, आवासीय परिसरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अहम दस्तावेज जब्त किए गए।
फर्जीवाड़े की जांच जारी
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी फंड को किन माध्यमों से डायवर्ट किया गया और किन लोगों को इसका फायदा मिला। शुरुआती जांच में फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन के संकेत मिले हैं। एजेंसी बैंक रिकॉर्ड्स और खातों की गहराई से जांच कर रही है।
अब तक 16 गिरफ्तारियां
इस मामले में अब तक 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे लगातार पूछताछ जारी है। अधिकारियों का मानना है कि आगे जांच में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। इस कार्रवाई के बाद हरियाणा के प्रशासनिक और बैंकिंग सिस्टम में हलचल तेज हो गई है, और पूरे मामले पर निगरानी बढ़ा दी गई है।


