छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां नारायणपुर जिले के दूरस्थ इरापनार गांव में दशकों बाद पहली बार बिजली पहुंची है। घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पहाड़ी इलाकों से घिरे इस गांव तक पहुंचना हमेशा से बेहद कठिन रहा है। बरसात के मौसम में तो यह इलाका लगभग पूरी तरह दुनिया से कट जाता था।
रायपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में बिजली पहुंचाना आसान नहीं था। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के कर्मचारियों ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए खंभे, तार और अन्य उपकरण गांव तक पहुंचाए। कई जगहों पर मशीनों के बजाय मानव श्रम का सहारा लेना पड़ा। इस पूरे प्रोजेक्ट को एक मिशन की तरह पूरा किया गया।
जिला प्रशासन के अनुसार, इस परियोजना पर लगभग 56.11 लाख रुपये खर्च किए गए। कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि लक्ष्य था कि कोई भी गांव विकास से वंचित न रहे। इस प्रयास से उन घरों तक पहली बार बिजली पहुंची, जहां पीढ़ियों से रोशनी का एकमात्र साधन लालटेन या लकड़ी की आग हुआ करता था।
बिजली आने के बाद गांव में जीवन तेजी से बदल रहा है। अब बच्चे रात में भी रोशनी में पढ़ाई कर पा रहे हैं। मोबाइल फोन चार्ज हो रहे हैं और धीरे-धीरे पंखे, बल्ब और अन्य छोटे उपकरणों का उपयोग शुरू हो गया है। एक ग्रामीण ने बताया कि जब पहली बार गांव में बल्ब जला, तो लोग खुशी से घरों से बाहर निकल आए और देर रात तक रोशनी का जश्न मनाते रहे।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि बिजली के साथ अब शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। इरापनार गांव की यह पहल अबूझमाड़ क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

