तमिलनाडु में राज्य के खजाने और कर्ज को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस विवाद में भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक ऐसा बयान सामने आया है जिसे कई लोग पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के समर्थन के तौर पर देख रहे हैं।
बीजेपी के झारखंड इकाई के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि उन्हें राज्य का “खाली खजाना” विरासत में मिला है।
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि तकनीकी रूप से किसी भी राज्य का खजाना पूरी तरह खाली नहीं हो सकता, क्योंकि सरकार की आय और व्यय लगातार चलते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चुनावों के दौरान बड़े वादे किए जाते हैं और बाद में वित्तीय चुनौतियों का हवाला दिया जाता है।
उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि चुनावी वादों को पूरा करने के लिए बजट का आकार बढ़ाना पड़ सकता है, इसलिए ऐसे दावे किए जाते हैं।
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री विजय ने आरोप लगाया था कि पिछली सरकार ने राज्य पर भारी कर्ज छोड़ा है और खजाना खाली कर दिया है। इसके जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा था कि राज्य का कर्ज अनुमेय सीमा के भीतर है और सरकार को अभी से वित्तीय संकट का बहाना नहीं बनाना चाहिए।
इस पूरे मामले पर अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं और तमिलनाडु की राजनीति में आर्थिक स्थिति को लेकर बहस गहराती जा रही है।

