नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना दौरे के दौरान देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। सिकंदराबाद में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने और खाने के तेल का सीमित उपयोग करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक हालात और पड़ोसी क्षेत्र में चल रहे युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, गैस और उर्वरक विदेशों से आयात करता है, जिसकी वजह से विदेशी मुद्रा पर भारी दबाव बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का बोझ आम नागरिकों पर न पड़े, लेकिन देशहित में जनता की भागीदारी भी जरूरी है।
सोना खरीदने को लेकर क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोने के आयात पर देश की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा:
“देशहित में हमें यह तय करना होगा कि अगले एक साल तक घर में कोई कार्यक्रम हो, तब भी हम सोने के गहने नहीं खरीदेंगे।”
उन्होंने कहा कि पहले संकट के समय लोग देश के लिए सोना दान करते थे, लेकिन अब दान की जरूरत नहीं है। केवल खरीद में संयम रखकर भी देश की मदद की जा सकती है।
खाने के तेल पर भी दी सलाह
पीएम मोदी ने खाने के तेल के आयात का जिक्र करते हुए कहा कि भारत बड़ी मात्रा में खाद्य तेल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में यदि लोग तेल का उपयोग थोड़ा कम करें तो इससे दो फायदे होंगे — विदेशी मुद्रा की बचत और बेहतर स्वास्थ्य।
उन्होंने कहा:
“तेल का कम इस्तेमाल देश सेवा भी है और देह सेवा भी।”
कांग्रेस ने की आलोचना
Indian National Congress ने प्रधानमंत्री के बयान की आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव K. C. Venugopal ने कहा कि सरकार को ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संकट से निपटने के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए, न कि आम लोगों पर जिम्मेदारी डालनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वैश्विक संकट से निपटने के बजाय राजनीतिक गतिविधियों में व्यस्त है।
क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें?
अमेरिका, ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक शेयर बाजार की बजाय सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।
सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव
- डॉलर पर घटता भरोसा
- केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी
- शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव
- वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
चीन, भारत, तुर्की और पोलैंड जैसे कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

