योगी सरकार में बड़ा बदलाव, 8 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ

shikha verma
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योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल किया गया। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हुए इस बदलाव को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

राज्यपाल Anandiben Patel ने कुल आठ नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिनमें छह नए चेहरे शामिल हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी ने चुनावी समीकरणों और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।

किन नेताओं को मिली जगह?

मंत्रिमंडल विस्तार में दो नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है:

  • भूपेंद्र सिंह चौधरी
  • मनोज कुमार पांडे

वहीं अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। दोनों पहले से मंत्रिमंडल का हिस्सा थे, लेकिन अब उन्हें अधिक जिम्मेदारी दी गई है।

इसके अलावा चार नेताओं को राज्य मंत्री बनाया गया है:

  • कृष्णा पासवान
  • कैलाश सिंह राजपूत
  • सुरेंद्र दिलेर
  • हंसराज विश्वकर्मा

इनमें कृष्णा पासवान इकलौती महिला मंत्री हैं। वह पासी समुदाय से आती हैं और फतेहपुर की खागा सीट से विधायक हैं।

बीजेपी नेताओं ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री Pankaj Chaudhary ने मंत्रिमंडल विस्तार को स्वागतयोग्य कदम बताते हुए कहा कि लंबे समय से लंबित निर्णय अब लिया गया है।

राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को गति देना है और यह फैसला केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में लिया गया है।

नए मंत्रियों की प्रतिक्रिया

मंत्री बनने के बाद कृष्णा पासवान ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि बीजेपी ने एक ज़मीनी कार्यकर्ता को बूथ स्तर से आगे बढ़ाकर मंत्री बनाया है।

वहीं सुरेंद्र दिलेर ने कहा कि पार्टी और नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करेंगे।

अखिलेश यादव ने साधा निशाना

Akhilesh Yadav ने मंत्रिमंडल विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले किया गया यह फेरबदल जनता को प्रभावित नहीं करेगा।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा कि “आखिरी नौ महीनों में मंत्री क्या कर लेंगे, जब नौ साल में सरकार कुछ खास नहीं कर सकी।”

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल में महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।

क्या है संवैधानिक सीमा?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, इसलिए राज्य में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

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