सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के बाद मामले का निस्तारण कर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य में टेट्रा पैक में शराब की बिक्री की अनुमति दी गई है, जिससे बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस तरह की पैकेजिंग से नाबालिगों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि बच्चे इसे सामान्य पेय समझकर स्कूल आदि में ले जा सकते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जो व्यक्ति शराब खरीदना चाहता है, वह किसी भी रूप में उसे खरीद सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ऐसी बिक्री से शैक्षणिक संस्थानों में किसी प्रकार की समस्या सामने आई है।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई ठोस अनुमति नहीं पाई गई है, जिसमें आबकारी नीति के तहत विशेष रूप से टेट्रा पैक में शराब बिक्री की बात कही गई हो। हालांकि, संकेत मिला कि 4 फरवरी को एक प्रशासनिक निर्णय के तहत छोटे पैक में शराब बिक्री की अनुमति दी गई थी, लेकिन संबंधित नीति दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
अंत में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह अपना आवेदन संबंधित प्राधिकरण को सौंप सकते हैं, ताकि मामले की जांच कर उचित निर्णय लिया जा सके।

