इन दिनों भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) चर्चा में है। संस्था ने दिल्ली पुलिस में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जांच के दायरे में आ गए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
मामले की शुरुआत 9–10 मार्च के बीच हुई, जब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कुछ यूज़र्स ने एफ़एसएसएआई की ‘रेगुलेटरी कंप्लायंस’ डायरेक्टर स्वीटी बेहरा की नियुक्ति पर सवाल उठाए।
इन पोस्ट्स में दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति नियमों के ख़िलाफ़ हुई और उनके पास पर्याप्त अनुभव नहीं है।
इसके अलावा, कुछ यूज़र्स ने एफ़एसएसएआई के सीईओ रजित पुनहनी पर भी सवाल उठाए और देश में मिलावटी खाद्य पदार्थों—जैसे दूध और पनीर—की बिक्री पर चिंता जताई।
एफ़आईआर में क्या कहा गया?
24 मार्च को एफ़एसएसएआई के संयुक्त निदेशक डॉ. संजय कुमार की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज की।
एफ़आईआर के मुताबिक:
- कुछ अज्ञात सोशल मीडिया हैंडल्स ने संस्था की छवि खराब करने की कोशिश की
- यह एक सुनियोजित साज़िश हो सकती है
- कुछ दस्तावेज़ जाली हैं और कुछ गोपनीय, जिन्हें अवैध तरीके से हासिल किया गया
- इस पूरे मामले में बाहरी (विदेशी) फंडिंग की भी आशंका जताई गई
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं (आपराधिक विश्वासघात और साझा मंशा) के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 72A के तहत मामला दर्ज किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म को नोटिस
1 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने X को नोटिस भेजकर कुछ अकाउंट्स की जानकारी मांगी।
इनमें ईमेल, फोन नंबर और आईपी एड्रेस जैसे विवरण शामिल हैं।
इन्फ्लुएंसर्स का पक्ष
कुछ इन्फ्लुएंसर्स का कहना है कि वे केवल एफ़एसएसएआई में कथित गड़बड़ियों को उजागर कर रहे थे। उनका दावा है:
- पोस्ट किए गए दस्तावेज़ सही हैं
- उन्होंने जांच के बाद ही जानकारी साझा की
- उनका मकसद मिलावटी खाद्य पदार्थों के मुद्दे को उठाना है
उन्होंने यह भी कहा कि वे एफ़आईआर को कानूनी तौर पर चुनौती देंगे।
अभी क्या स्थिति है?
- एफ़आईआर फिलहाल अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज है
- कुछ अकाउंट्स ने अपने पोस्ट हटा दिए हैं
- जांच जारी है और पुलिस आगे की जानकारी जुटा रही है

