ईरान पर बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों और अमेरिका के संबंधों पर अरब मीडिया में लगातार चर्चा हो रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों ने अमेरिका पर दबाव डाला है ताकि ईरान को स्थायी रूप से निष्क्रिय किया जा सके और होर्मुज़ स्ट्रेट सहित खाड़ी के तेल मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कुछ मीडिया संस्थानों ने इस कदम का समर्थन किया और कहा कि खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए ईरान की क्षमताओं को पहले खत्म करना आवश्यक है। वहीं, अन्य मीडिया संस्थानों ने अमेरिकी निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका खाड़ी देशों को संभावित ईरानी हमलों के जोखिम में अकेला छोड़ सकता है।
सऊदी अरब स्थित गल्फ़ रिसर्च सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअज़ीज़ सगीर ने रॉयटर्स से कहा कि अगर अमेरिका कार्रवाई पूरी किए बिना पीछे हटता है, तो खाड़ी देशों को अकेले ईरान का सामना करना पड़ेगा। ओमान के शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि जीसीसी देश अपनी सुरक्षा निर्भरता पर पुनर्विचार करेंगे और साझा रक्षा तंत्र की संभावना पर चर्चा करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने का प्रस्ताव रखा। अरब मीडिया में इस प्रस्ताव पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ देशों ने इसे स्वीकार किया, जबकि कई ने हिचकिचाहट और वैकल्पिक उपाय सुझाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि खतरा सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय और इसराइली परियोजनाएं भी खाड़ी देशों की सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी सहयोगियों और इसराइल के परमाणु हथियारों को लेकर भी व्यापक चर्चा देखी गई।
ईरान और खाड़ी क्षेत्र के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की नज़रें इस क्षेत्र की सुरक्षा और अमेरिका की भूमिका पर केंद्रित कर दी हैं।
