टी20 वर्ल्ड कप में शानदार शुरुआत करने वाली भारत राष्ट्रीय क्रिकेट टीम अब मुश्किल हालात में फंसती नजर आ रही है। टूर्नामेंट में सबसे बड़े दावेदार के रूप में उतरी भारतीय टीम ने पहले चरण के चारों मैच जीतकर सुपर-8 में जगह बनाई थी। 2024 में खिताब जीतने के बाद से भारत ने 41 में से 31 टी20 मैच जीते थे, जिससे उसका आत्मविश्वास चरम पर था।
लेकिन सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के हाथों 76 रन की बड़ी हार ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए। अब सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए भारत को सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ही नहीं, बल्कि अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा।
गुरुवार को चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में भारत का सामना जिम्बाब्वे राष्ट्रीय क्रिकेट टीम से होगा। यह मुकाबला भारत के लिए ‘मस्ट विन’ बन चुका है। इतना ही नहीं, टीम और फैंस की निगाहें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होने वाले वेस्ट इंडीज क्रिकेट टीम बनाम दक्षिण अफ्रीका मैच पर भी टिकी रहेंगी।
भारत के लिए सबसे अनुकूल स्थिति यही होगी कि दक्षिण अफ्रीका वेस्ट इंडीज़ को हरा दे। अगर वेस्ट इंडीज़ जीतता है तो उसके चार अंक हो जाएंगे और बेहतर नेट रन रेट के कारण भारत के लिए आगे निकलना मुश्किल हो सकता है। मौजूदा आंकड़ों में भारत का नेट रन रेट निगेटिव है, जो उसकी चिंता बढ़ा रहा है।
पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा कि भारत को रन रेट बनाए रखने और स्लो बॉल व स्पिन के खिलाफ बेहतर रणनीति अपनाने की जरूरत है। वहीं आकाश चोपड़ा का मानना है कि बल्लेबाजी में झिझक टीम के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
अब भारत के लिए हर मैच फाइनल जैसा है—एक और ‘खराब दिन’ उसे टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

