कैशलेस इलाज से लोगों को राहत, पंजाब में बढ़े मौसमी बीमारियों के मामले

shikha verma
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पंजाब में बदलते मौसम और बढ़ते मौसमी बीमारियों के मामलों के बीच ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत हजारों मरीजों को बिना किसी आर्थिक बोझ के कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है।

राज्य में बढ़ते बुखार, सांस की समस्याओं और पेट से जुड़ी बीमारियों के बीच सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

बुखार से जुड़े मामलों में सबसे ज्यादा क्लेम

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में सबसे ज्यादा क्लेम ‘एक्यूट फेब्राइल इलनेस’ यानी तेज बुखार से जुड़ी बीमारियों के लिए किए गए हैं। पिछले चार महीनों में इसके 5,840 मामले दर्ज हुए, जिन पर करीब 1.31 करोड़ रुपये के क्लेम का भुगतान किया गया।

इसके अलावा:

  • एंटेरिक फीवर के 1,396 मामले (30.47 लाख रुपये के क्लेम)
  • निमोनिया के 377 मामले (11.06 लाख रुपये)
  • एक्यूट ब्रोंकाइटिस के 326 मामले (9.24 लाख रुपये) दर्ज किए गए।

डेंगू और मलेरिया के मामले कम

मॉनसून से जुड़ी बीमारियों के मामलों में इस बार अपेक्षाकृत कमी देखी गई है। डेंगू के 12 मामले, मलेरिया के 3 मामले और चिकनगुनिया के 6 मामले दर्ज हुए हैं। हीट स्ट्रोक के भी केवल 4 मामले सामने आए।

विशेषज्ञों की चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी बीमारियां मौसम और साफ-सफाई की स्थिति के अनुसार तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

पटियाला सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर विकास गोयल ने कहा कि अधिकतर मामलों का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर संभव है। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।

उन्होंने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह योजना मरीजों को आर्थिक चिंता के बिना समय पर इलाज उपलब्ध कराती है।

बच्चों को ज्यादा खतरा

गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग प्रमुख डॉक्टर शशि कांत धीर ने कहा कि छोटे बच्चे और नवजात शिशु संक्रमण के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

उन्होंने कहा कि दूध न पीना, उल्टी, तेज सांस लेना, डिहाइड्रेशन और लगातार बुखार जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

जागरूकता पर जोर

विशेषज्ञों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स और स्कूलों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। साफ-सफाई, टीकाकरण और मच्छर नियंत्रण जैसे उपायों से मौसमी बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। बढ़ती गर्मी और मौसमी बीमारियों के बीच यह योजना राज्य के हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

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