शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राजनीतिक दलों और धार्मिक मुद्दों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उनका बीजेपी, कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। वह केवल धर्म, गौमाता और मतदाता के अधिकारों जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाते हैं।
शंकराचार्य ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2015 में काशी में एक आंदोलन के दौरान उन पर लाठीचार्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि उस समय बीजेपी के कई कार्यकर्ता उनके साथ खड़े थे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि वह किसी राजनीतिक दल के समर्थक थे।
उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी ने हमारे ऊपर लाठी चलवाई थी। उस समय बीजेपी के लोग हमारे साथ खड़े हुए थे, इसलिए यह समझ लिया गया कि हम बीजेपी के हैं, जबकि ऐसा नहीं है।”
‘राजनीतिक दलों से हमारा कोई लेना-देना नहीं’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बीजेपी हो या कांग्रेस, सभी राजनीतिक दल हैं और उनका उद्देश्य किसी पार्टी का समर्थन या विरोध करना नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें सत्ता या सरकारी सुविधाओं से कोई लगाव नहीं है और वह अपने धार्मिक कार्यों को अपने स्तर पर संचालित करते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी सरकारी धन से जुड़े कुछ प्रस्तावों का विरोध किया था, क्योंकि उनके अनुसार धार्मिक कार्यों में पवित्रता और सिद्धांतों का ध्यान रखना जरूरी है।
गौमाता और मतदाता अधिकारों को बताया प्रमुख मुद्दा
शंकराचार्य ने कहा कि वर्तमान में उनका सबसे बड़ा मुद्दा गौमाता की रक्षा और मतदाता के अधिकार हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने वोट के जरिए सरकार चुनती है, इसलिए जनता की सहमति और भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
उन्होंने मांस निर्यात के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकारों को ऐसे फैसले लेने से पहले जनता की भावनाओं को ध्यान में रखना चाहिए।
‘हमें सिर्फ धर्म से लेना-देना है’
शंकराचार्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष धर्म और धार्मिक मूल्यों से जुड़े मुद्दों के लिए है।
उन्होंने कहा, “हमें किसी पार्टी से नहीं, बल्कि धर्म और धर्म के प्रतीकों से लेना-देना है। हम अपने मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहेंगे।”


