बाढ़ राहत में योगी सरकार की संवेदनशील पहल, फर्रूखाबाद में प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद

shikha verma
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की बाढ़ प्रभावित लोगों को त्वरित राहत और सुरक्षित पुनर्वास उपलब्ध कराने की नीति के तहत फर्रूखाबाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। सदर, अमृतपुर और कायमगंज तहसीलों में राहत एवं बचाव कार्यों के साथ प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, स्वास्थ्य, पशु चिकित्सा और सुरक्षित आश्रय की व्यापक व्यवस्था की गई है।

प्रशासन की तैयारियों की खास बात यह है कि बाढ़ शरणालयों में केवल प्रभावित परिवारों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास का भी ध्यान रखा जा रहा है। तीनों तहसीलों में बनाए गए मॉडल शरणालयों में बच्चों के लिए स्मार्ट क्लास, मनोरंजन कक्ष और खेलकूद की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

63 गांव बाढ़ से प्रभावित

19 अगस्त को नरोरा बैराज से गंगा नदी में 1,15,137 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर दर्ज किया गया, जो 137.10 मीटर के खतरे के निशान से नीचे है। वहीं रामगंगा नदी में 75,445 क्यूसेक पानी पास हुआ और रामगंगा सेतु पर जलस्तर भी खतरे के निशान से नीचे बना हुआ है।

फर्रूखाबाद को अतिसंवेदनशील बाढ़ प्रभावित जिलों में शामिल किए जाने के कारण प्रशासन लगातार सतर्कता बरत रहा है। जिले की तीनों तहसीलों के 63 गांवों में आबादी और कृषि क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिले में 52 बाढ़ चौकियां और 24 अस्थाई बाढ़ शरणालय संचालित किए जा रहे हैं। इनमें सदर तहसील में 5, कायमगंज में 15 और अमृतपुर में 33 बाढ़ चौकियां शामिल हैं। तीनों तहसीलों में एक-एक मॉडल शरणालय भी संचालित है।

191 नावें और 53 गोताखोर तैयार

बचाव एवं राहत कार्यों के लिए 191 निजी नाव और नाविक तथा 53 प्रशिक्षित गोताखोर सेफ्टी किट के साथ तैनात हैं। राहत दलों के पास लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, सर्च लाइट, सेफ्टी हेलमेट, रेनकोट, मेगाफोन, रस्सी समेत आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं।

जिले में 24 घंटे बाढ़ नियंत्रण कक्षों के माध्यम से स्थिति की निगरानी की जा रही है। कलेक्ट्रेट, जिलाधिकारी कैंप कार्यालय और सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम सक्रिय हैं।

स्वास्थ्य और पशु चिकित्सा सेवाएं भी मजबूत

बाढ़ प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 17 मेडिकल टीमें गठित की गई हैं। अब तक 144 मेडिकल कैंप लगाए जा चुके हैं, जिनमें 8,073 लोगों का उपचार किया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में 10,413 ओआरएस पैकेट और 9,063 क्लोरीन टैबलेट वितरित की गई हैं।

पशुओं की देखभाल के लिए 6 पशु चिकित्सा टीमें, 14 अस्थाई पशु शरणालय और 54 पशु शिविर संचालित हैं। इनमें 3,273 पशुओं का उपचार और 7,237 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। पशुपालकों को 120 क्विंटल भूसा भी वितरित किया गया है।

प्रभावित परिवारों को भोजन और सुरक्षित आश्रय

प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों तक खाद्यान्न और पका हुआ भोजन पहुंचाया जा रहा है। अब तक 10,621 परिवारों को सूखे खाद्यान्न के पैकेट वितरित किए गए हैं। 661 विस्थापित लोगों को बाढ़ शरणालयों में सुरक्षित रखा गया है, जहां उन्हें नियमित रूप से नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 7,939 पके भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास पर भी फोकस

जिला प्रशासन ने राहत के साथ प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी जोर दिया है। सदर तहसील के दिलीप की मड़ैया गांव में 25 परिवारों को आवासीय पट्टे दिए जा चुके हैं, जबकि 21 परिवारों के खातों में पट्टे की धनराशि उपलब्ध कराई गई है।

जिले में बाढ़ से 50,775 लोगों की आबादी और 2,881.8 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों वाले 21 परिवारों को 25.20 लाख रुपये गृह अनुदान के रूप में दिए जा चुके हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद फसलों का सर्वे कराया जाएगा और पात्र किसानों को कृषि निवेश अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

जलभराव सहन करने वाली धान की प्रजाति किसानों को उपलब्ध

कृषि विभाग की ओर से किसानों को जलभराव सहन करने वाली आईआर-64 सब-1 जैसी धान की प्रजाति भी उपलब्ध कराई गई है। यह प्रजाति लंबे समय तक जलभराव की स्थिति के बाद भी दोबारा विकसित होने की क्षमता रखती है, जिससे प्रभावित किसानों को नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देशन में जिला प्रशासन राहत एवं बचाव के साथ-साथ दीर्घकालिक पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वावधान में एनडीआरएफ, आर्मी, फ्लड पीएसी, राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, सिंचाई और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से 2 मॉकड्रिल, बाढ़ राहत चौपाल और 19 स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।

प्रशासन का लक्ष्य बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर राहत पहुंचाने, जनहानि को रोकने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ उनके स्थायी पुनर्वास को सुनिश्चित करना है।

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