जापानी निवेश से यूपी को नई उड़ान, ‘विकसित यूपी’ के संकल्प को मिलेगी रफ्तार

shikha verma
9 Min Read

कभी उत्तर प्रदेश को देश के औद्योगिक विकास में पिछड़ा राज्य माना जाता था। कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल को लेकर बनी पुरानी धारणा के कारण उद्योग जगत यहां निवेश को लेकर अपेक्षाकृत सतर्क रहता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य की आर्थिक और औद्योगिक तस्वीर में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। आज उत्तर प्रदेश देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के साथ वैश्विक निवेशकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण गंतव्य बनकर उभर रहा है।

नई दिल्ली में आयोजित ‘यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026’ इसी बदलते औद्योगिक परिदृश्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आया। कार्यक्रम में जापानी प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों की भागीदारी के साथ उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई।

जापान और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ती साझेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान और उत्तर प्रदेश के बीच मौजूद सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को आर्थिक और औद्योगिक सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया। जापान की तकनीकी दक्षता, गुणवत्ता और मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञता को उत्तर प्रदेश की युवा आबादी, बड़े बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक क्षमता के साथ जोड़ने की दिशा में कई पहल की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने जापानी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश के साथ-साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, स्किल डेवलपमेंट संस्थान और वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने के लिए आमंत्रित किया है।

18 से 23 अगस्त तक आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में 200 से अधिक जापानी उद्योगपति, सीईओ, कारोबारी प्रतिनिधि और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं। एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा गया।

यीडा में 3,195 करोड़ रुपये की परियोजनाएं

निवेश सम्मेलन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में करीब 3,195 करोड़ रुपये की दो औद्योगिक परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग शामिल रही।

एस्कॉर्ट्स कुबोटा लिमिटेड यीडा के सेक्टर-10 में करीब 2,029 करोड़ रुपये के निवेश से विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। प्रस्तावित इकाई में प्रतिवर्ष करीब 60 हजार ट्रैक्टर और 15 हजार कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के उत्पादन की योजना है। इससे हजारों प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

इसी तरह स्पार्क मिंडा की ओर से यीडा क्षेत्र में दो विनिर्माण परियोजनाओं के लिए करीब 1,166 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। इन परियोजनाओं से भी बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने के साथ स्थानीय सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

निवेशकों का बढ़ता भरोसा

उत्तर प्रदेश में पहले से काम कर रही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का अनुभव भी राज्य के बदलते कारोबारी माहौल को रेखांकित करता है। ऑटोमोटिव क्षेत्र की प्रमुख कंपनी मदरसन ग्रुप के उत्तर प्रदेश में कई प्लांट संचालित हैं और कंपनी का वैश्विक मुख्यालय नोएडा में है।

ईवी और बैटरी रीसाइक्लिंग क्षेत्र में सक्रिय लोहम ने भी ग्रेटर नोएडा से अपनी शुरुआत के बाद उत्तर प्रदेश में अपने कारोबार का विस्तार किया है। कंपनी की ओर से अतिरिक्त निवेश और नई विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की योजनाएं सामने आई हैं।

जापानी ऑटो कंपोनेंट कंपनी डेन्सो की ओर से नोएडा स्थित संयंत्र के विस्तार के लिए प्रस्तावित निवेश भी प्रदेश में जापानी कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। वहीं सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सक्रिय कंपनियां भी नोएडा और प्रदेश के अन्य शहरों में तकनीकी एवं स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार की संभावनाएं तलाश रही हैं।

‘जापान सिटी’ से मजबूत होगा औद्योगिक इकोसिस्टम

जापानी निवेशकों को एकीकृत औद्योगिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास ‘जापान सिटी’ विकसित करने की योजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके आसपास सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

इस तरह का इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम जापानी कंपनियों को उत्पादन, सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और सहयोगी उद्योगों के लिए एक ही क्षेत्र में सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी पर जोर

भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। आईआईटी कानपुर, एचबीटीयू कानपुर, आईआईटी बीएचयू और एमएमएमयूटी गोरखपुर जैसे संस्थानों के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में पहल की गई है।

इसके साथ ही सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, रिन्यूएबल एनर्जी और अन्य ग्रीन टेक्नोलॉजी क्षेत्रों में भी निवेश और निर्यात की संभावनाएं तलाशने पर जोर है।

मजबूत कनेक्टिविटी बनी निवेश की बड़ी ताकत

उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को बढ़ाने में राज्य का एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य में एक्सप्रेसवे का व्यापक नेटवर्क, एयरपोर्ट कनेक्टिविटी, बड़ा रेल नेटवर्क, मेट्रो सेवाएं और अंतर्देशीय जलमार्ग जैसी सुविधाएं उद्योगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रही हैं।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कार्गो, लॉजिस्टिक्स और एमआरओ गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी भविष्य में औद्योगिक निवेश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ी हिस्सेदारी

इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय विस्तार किया है। राज्य में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल निर्माण इकाइयां स्थापित हुई हैं। इससे प्रदेश में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

सरकार की ओर से आईटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर पावर, फूड प्रोसेसिंग और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए सेक्टर आधारित नीतियां लागू की गई हैं। निवेशकों की सुविधा के लिए लैंड बैंक और औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

‘निवेश मित्र’ से आसान हो रही कारोबारी प्रक्रिया

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए ‘निवेश मित्र’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। आवेदन से लेकर विभिन्न विभागीय अनुमतियों तक की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से ट्रैक करने की सुविधा निवेशकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

नीतिगत स्थिरता, बेहतर कानून-व्यवस्था और औद्योगिक परियोजनाओं की निगरानी पर जोर ने भी प्रदेश में निवेश के माहौल को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

जापानी तकनीक और यूपी की क्षमता का मेल

उत्तर प्रदेश और जापान की औद्योगिक साझेदारी को केवल निवेश के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा। जापान की तकनीकी विशेषज्ञता, गुणवत्ता और अनुसंधान क्षमता का मेल उत्तर प्रदेश की युवा कार्यशक्ति, विशाल बाजार और तेजी से विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर से होता है, तो इससे विनिर्माण और तकनीकी क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।

यदि प्रस्तावित परियोजनाएं समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती हैं, तो इससे रोजगार, स्थानीय सप्लाई चेन, एमएसएमई और तकनीकी कौशल विकास को भी गति मिल सकती है।

कुल मिलाकर, यूपी-जापान औद्योगिक साझेदारी उत्तर प्रदेश की बदलती आर्थिक तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है। जापानी निवेश और तकनीकी सहयोग राज्य को वैश्विक विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई ऊंचाई दे सकता है। साथ ही, यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने और ‘विकसित भारत’ के व्यापक संकल्प में अपनी भूमिका मजबूत करने में सहायक हो सकती है।

Share This Article
Leave a Comment