दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ (पूर्व में ‘पंजाब ’95’) इन दिनों चर्चा में है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के कुछ समय बाद फिल्म को हटाए जाने के बाद यह एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित बताई जाती है।
कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
जसवंत सिंह खालरा का जन्म 1952 में पंजाब के अमृतसर जिले के खालरा गांव में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बैंक कर्मचारी के रूप में की, लेकिन बाद में मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर सक्रिय रूप से काम करने लगे।
मानवाधिकार मामलों की जांच से मिली पहचान
1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद और आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान कई लोगों के कथित रूप से लापता होने के मामलों ने उनका ध्यान खींचा। उन्होंने ऐसे मामलों की जानकारी जुटानी शुरू की और नगर निगम के रिकॉर्ड सहित विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर कथित गुप्त अंतिम संस्कारों और मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक किया। उनके काम ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया।
1995 में हुए लापता
सितंबर 1995 में जसवंत सिंह खालरा रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच में उनके अपहरण और हत्या के आरोप में पंजाब पुलिस के कई अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने इस मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
‘सतलुज’ क्यों है चर्चा में?
निर्देशक हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलुज’ जसवंत सिंह खालरा के जीवन से प्रेरित मानी जाती है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं, जबकि अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम किरदार निभा रहे हैं।
फिल्म हाल ही में एक ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद इसे हटा लिया गया। प्लेटफॉर्म ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि वह फिल्म और उसके निर्माताओं का समर्थन करता है तथा कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि इसे दोबारा दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।


