अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे को ट्रस्ट ने आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। यह निर्णय 6 जुलाई को आयोजित ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया, जिसमें कई वरिष्ठ संत और ट्रस्ट सदस्य शामिल हुए।
सूत्रों के अनुसार, बैठक की शुरुआत कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने एजेंडा प्रस्तुत करके की। बैठक में हाल ही में सामने आए कथित अनियमितताओं और चढ़ावे से जुड़े विवादों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर औपचारिक रूप से विचार किया गया।
बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि दोनों संबंधित सदस्य प्रारंभिक चर्चा से स्वयं को अलग रखें, ताकि बाकी ट्रस्ट सदस्य पूरे मामले पर स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से विचार कर सकें। इसके बाद यह तय किया गया कि दोनों को बाद में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
चर्चा के दौरान ट्रस्ट के कई सदस्यों ने मामले की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की। महंत नृत्य गोपाल दास, जो बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे, ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी नाराजगी और दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि आस्था से भी जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक का माहौल काफी गंभीर रहा और कई सदस्यों ने इस प्रकरण को “आस्था पर चोट” जैसा विषय बताया। इसी बीच यह भी कहा गया कि ट्रस्ट की प्रतिष्ठा और मंदिर निर्माण कार्य की पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगे की प्रक्रिया में सभी संबंधित तथ्यों की विस्तृत जांच की जाएगी और आवश्यकतानुसार प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से बचा जा सके जिससे ट्रस्ट की छवि प्रभावित हो।
चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के महासचिव के रूप में कार्यरत थे और राम मंदिर निर्माण से जुड़े प्रमुख प्रशासनिक कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वहीं अनिल मिश्रा भी ट्रस्ट के सक्रिय सदस्यों में शामिल रहे हैं। दोनों के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
फिलहाल ट्रस्ट की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो सकता है कि इन पदों पर नई नियुक्तियां कब और कैसे की जाएंगी। इस फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और आगामी योजनाओं को लेकर भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।


