ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। हालिया संघर्ष विराम और कूटनीतिक बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
अमेरिका और इसराइल की ओर से ईरान पर हमलों और उसके बाद शुरू हुई वार्ताओं के बावजूद स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। दोनों पक्षों के बीच पांच बड़े मुद्दे अब भी गतिरोध की मुख्य वजह हैं।
इनमें शामिल हैं:
- यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम
- संवर्धित यूरेनियम भंडार का भविष्य
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
- क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों की गतिविधियां
- ईरान का मिसाइल कार्यक्रम
1. यूरेनियम संवर्धन बना सबसे बड़ा विवाद
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों — जैसे ऊर्जा, अनुसंधान और चिकित्सीय उपयोग — के लिए जरूरी बताता है। वहीं अमेरिका और इसराइल को आशंका है कि यह कार्यक्रम परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़, हालिया संघर्ष से पहले ईरान 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर चुका था, जिसे हथियार स्तर के बेहद करीब माना जाता है।
अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक या स्थायी रूप से संवर्धन गतिविधियां रोक दे, जबकि तेहरान सीमित और अंतरराष्ट्रीय निगरानी वाले कार्यक्रम पर सहमत होने की बात करता है, लेकिन पूरी तरह बंद करने को तैयार नहीं है।
2. संवर्धित यूरेनियम भंडार पर टकराव
अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के अनुसार युद्ध से पहले ईरान के पास बड़ी मात्रा में उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद था।
अमेरिका चाहता है कि यह भंडार या तो पूरी तरह नष्ट किया जाए या किसी तीसरे देश को सौंप दिया जाए। दूसरी ओर ईरान कुछ हिस्से को कम स्तर पर लाने और सीमित मात्रा बाहर भेजने को तैयार दिख रहा है, लेकिन पूरा नियंत्रण छोड़ने को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है।
3. होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अमेरिका चाहता है कि यह समुद्री मार्ग बिना किसी शर्त के खुला रहे, जबकि ईरान इसे अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में देखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यहां तनाव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाज़ार और तेल कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
4. ‘प्रतिरोध धुरी’ को लेकर अमेरिकी चिंता
अमेरिका का आरोप है कि ईरान लेबनान के Hezbollah, यमन के हूती विद्रोहियों और इराक़ के शिया समूहों को समर्थन देता है।
तेहरान इन समूहों को “प्रतिरोध धुरी” का हिस्सा बताता है और कहता है कि ये संगठन स्वतंत्र रूप से इसराइल और अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध करते हैं।
गाज़ा युद्ध के बाद क्षेत्र में इन समूहों की गतिविधियां और हमले बढ़ने से अमेरिका की चिंता और बढ़ गई है।
5. मिसाइल कार्यक्रम पर नहीं झुक रहा ईरान
ईरान ने पिछले दो दशकों में बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। अमेरिका और उसके सहयोगी इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानते हैं।
हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने इसराइल और अमेरिकी ठिकानों की ओर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।
हालांकि अमेरिका इस मुद्दे को बातचीत में उठाता रहा है, लेकिन ईरान साफ़ कह चुका है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम उसकी सुरक्षा नीति का हिस्सा है और इस पर कोई समझौता नहीं होगा।
क्यों अहम है यह टकराव?
ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं है। इसका असर:
- वैश्विक तेल कीमतों
- मध्य पूर्व की स्थिरता
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार
- ऊर्जा सुरक्षा
पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर दोनों countries के बीच समझौता नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।


