ईरान में फैसलों को लेकर अनिश्चितता, सत्ता के कई केंद्र उभरे

shikha verma
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ईरान में अमेरिका और इसराइल के साथ तनाव के बीच यह सवाल लगातार चर्चा में है कि देश की वास्तविक सत्ता किसके पास है। औपचारिक रूप से सर्वोच्च सत्ता ईरान के सर्वोच्च नेता के पास मानी जाती है, लेकिन मौजूदा हालात में शक्ति के कई केंद्र उभरते दिखाई दे रहे हैं।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर ग़ालिबाफ़ जैसी राजनीतिक हस्तियां कूटनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय हैं, लेकिन रणनीतिक फैसलों में उनकी भूमिका सीमित मानी जा रही है। कई मामलों में निर्णय प्रक्रिया अस्पष्ट और बिखरी हुई नजर आती है।

विशेष रूप से ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) की भूमिका हाल के समय में और मजबूत हुई है। सैन्य और सुरक्षा से जुड़े अहम फैसलों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि वास्तविक ऑपरेशनल नियंत्रण काफी हद तक इसी संस्था के पास है।

कूटनीतिक मोर्चे पर विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची की भूमिका भी मुख्य रूप से संचालन तक सीमित बताई जा रही है, जबकि रणनीतिक दिशा तय करने में उनकी स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में फैसले किसी एक केंद्र से नहीं बल्कि कई शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन के आधार पर लिए जा रहे हैं। इससे नीतिगत स्पष्टता की कमी और निर्णय प्रक्रिया में अनिश्चितता की स्थिति बन गई है।

हालांकि, इसके बावजूद ईरान की शासन व्यवस्था अभी पूरी तरह स्थिर बनी हुई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तविक नेतृत्व और अंतिम निर्णय लेने की शक्ति किसके पास अधिक प्रभावी रूप से मौजूद है—राजनीतिक नेतृत्व, संसद या सैन्य तंत्र।

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