सीबीएसई रिज़ल्ट में गिरावट से छात्रों की चिंता बढ़ी, रीचेकिंग की मांग तेज़

shikha verma
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Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस बार कुल 85.20% छात्र परीक्षा में सफल हुए, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 88.39% था। कोविड महामारी के बाद यह पहली बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

इस बार सीबीएसई ने पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की। इसके तहत लगभग 98 लाख से अधिक कॉपियों को स्कैन कर डिजिटल माध्यम से जांचा गया। बोर्ड के अनुसार इस नई व्यवस्था से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज़, पारदर्शी और कम त्रुटिपूर्ण बनी।

हालांकि परिणाम आने के बाद छात्रों, शिक्षकों और कई स्कूल प्रबंधन ने इस प्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान उनके विस्तृत उत्तरों का सही मूल्यांकन नहीं हुआ।

सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर नाराज़गी देखी गई। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं। ऑनलाइन याचिकाओं और पोस्ट्स के जरिए OSM प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की जा रही है।

पिछले वर्षों की तुलना में पास प्रतिशत

  • 2026 — 85.20%
  • 2025 — 88.39%
  • 2024 — 87.98%
  • 2022 — 92.71%
  • 2021 — 99.37% (कोविड के दौरान वैकल्पिक मूल्यांकन)
  • 2020 — 88.78%
  • 2019 — 83.40%

OSM प्रणाली क्या है?

ऑन स्क्रीन मार्किंग के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर परीक्षकों को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराया जाता है। शिक्षक ऑनलाइन ही कॉपियों का मूल्यांकन करते हैं।

सीबीएसई का कहना है कि:

  • मूल्यांकन अधिक पारदर्शी हुआ
  • कॉपियों की जांच कम समय में पूरी हुई
  • नतीजे जल्दी जारी किए जा सके
  • शिक्षकों को पहले से प्रशिक्षण और मॉक इवैल्यूएशन कराया गया

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

Krishna Kumar सहित कई शिक्षा विशेषज्ञों ने OSM प्रणाली को जल्दबाज़ी में लागू किए जाने पर चिंता जताई है। उनका मानना है कि:

  • स्कैन की गई कॉपियों की गुणवत्ता हर जगह समान नहीं रही
  • डिजिटल जांच में लंबे उत्तरों का सही आकलन प्रभावित हो सकता है
  • जल्द परिणाम घोषित करने के दबाव का असर छात्रों पर पड़ा

क्या सिर्फ OSM ही जिम्मेदार है?

कुछ शिक्षकों और स्कूल प्रशासकों का मानना है कि केवल डिजिटल मूल्यांकन को दोष नहीं दिया जा सकता। उनके अनुसार अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं:

  • प्रश्नपत्रों में स्किल आधारित और केस स्टडी आधारित सवालों की बढ़ोतरी
  • अनुभवहीन शिक्षकों द्वारा कॉपी जांच
  • कोचिंग आधारित पढ़ाई का बढ़ता प्रभाव
  • जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं पर अधिक फोकस
  • नियमित स्कूल पढ़ाई में कमी

छात्रों की चिंता

कई छात्रों का कहना है कि:

  • वैकल्पिक प्रश्नों के अंक नहीं मिले
  • अपेक्षा से बहुत कम नंबर आए
  • अच्छे प्रदर्शन के बावजूद परिणाम कमजोर रहा

शिक्षकों का मानना है कि यदि छात्रों के अंक कम रहेंगे तो आगे कॉलेज एडमिशन में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

बोर्ड की स्थिति

सीबीएसई ने अभी तक OSM को लेकर उठे आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि बोर्ड का कहना है कि:

  • रीचेकिंग की सुविधा उपलब्ध है
  • गलत मूल्यांकन पाए जाने पर जवाबदेही तय की जाती है

फिलहाल 2026 के परिणामों ने देशभर में परीक्षा प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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