सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मीनाक्षी नटराजन की याचिका, आगे क्या हैं कानूनी विकल्प?

shikha verma
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कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव नामांकन विवाद में सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान न्यायालय आमतौर पर हस्तक्षेप नहीं करता और ऐसे मामलों में चुनाव याचिका (Election Petition) ही उचित कानूनी उपाय है।

मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित घोषित होने के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। नटराजन का नामांकन रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि उन्होंने अपने हलफनामे में एक लंबित न्यायिक मामले की जानकारी नहीं दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329(बी) का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव संबंधी विवादों को चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनौती दी जा सकती है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नटराजन के लिए चुनाव याचिका दाखिल करने का रास्ता खुला है।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत कोई भी उम्मीदवार चुनाव परिणाम घोषित होने के 45 दिनों के भीतर संबंधित हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकता है। यदि अदालत यह पाती है कि किसी उम्मीदवार का नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया था, तो चुनाव को निरस्त भी किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत हार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए भी चिंता का विषय है। उन्होंने चुनाव आयोग पर समय रहते कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।

इस पूरे विवाद ने रिटर्निंग ऑफिसर की शक्तियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नामांकन पत्र में कथित त्रुटियों के आधार पर उम्मीदवार को चुनाव मैदान से बाहर करना अंतिम विकल्प होना चाहिए और जहां संभव हो, उम्मीदवार को सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अब नटराजन के पास मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने का ही विकल्प बचा है। हालांकि ऐसे मामलों के निपटारे में अक्सर लंबा समय लग जाता है, जिसके कारण अंतिम फैसला आने तक संबंधित कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बीत सकता है।

यह मामला अब इस प्रश्न पर केंद्रित हो गया है कि क्या रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून की सही व्याख्या करते हुए नामांकन रद्द किया था और क्या उम्मीदवार को पर्याप्त अवसर दिया गया था। इन सवालों का अंतिम जवाब अब चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ही तय करेगी।

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